अभी सीख रहा हूँ

वे भारतीय सिनेमा में बॉलीवुड कहे जाने वाली दुनिया के सबसे महंगे गायक हैं, लेकिन नब्बे के दशक में अपनी गायकी से फिल्मी दुनिया को रू-ब-रू करवाने वाले गीतकार और संगीतकार सुखविंदर सिंह आज भी अपने वे पुराने दिन नहीं भूले हैं, जब वे केवल एक गीत गाने के लिए संगीतकारों और निर्माताओं के चक्कर लगाया करते थे। पहली बार उन्होंने कर्मा में एलपी के साथ आनंद बक्षी का लिखा गीत गाया था, लेकिन आज उनके पास काम और नाम की कमी नहीं होने के बावजूद वे जमीन से जुड़े आदमी हैं। वे महंगे स्टाइलिश कपड़ों के साथ वे सारे तामझाम अपनाते हैं जो किसी नामी कलाकार का शगल हो सकते हैं। इसके बावजूद जब वे पहली बार स्टार प्लस के शो वॉयस ऑफ इंडिया-टू के नए सीजन के लिए टीवी पर बतौर जज बने तो चैनल से कहा कि वे अपना निर्णय बताने और शो में शामिल होने के लिए किसी नाटक में शामिल नहीं होंगे। हालॉंकि वे यह भी मानते हैं कि बाजार में बने रहने के लिए किसी का भी मेकओवर होना जरूरी है।

जैसे आपने अपना मेकओवर किया?

नहीं ऐसी बात नहीं मैंने इस शो में हिस्सेदारी इसलिए की कि चैनल ने कहा कि वे मेरे लिए किसी नाटकीयता का सहारा नहीं लेंगे। मैं जानता हूँ कि मुझे कब और कहां क्या करना चाहिए?

फिर भी आपको लगता है कि ऐसे रियाल्टी शो में आप क्यों शामिल हुए?

दरअसल गजेन्द्र के शो केवल रियाल्टी शो नहीं होते। उन्होंने अब तक जितनी प्रतिभाएं दीं वे अद्भुत हैं। चाहे वह श्रेया हो या देबोजीत। हालॉंकि जब उन्होंने मुझे कहा तो मैंने मना कर दिया था, लेकिन इनकार के बाद जब घर लौटा तो लगा कि एक बार करके देखना चाहिए और अगले दिन मैं वॉयस ऑफ इंडिया के सैट पर उन्हें बिना बताए चला गया।

लेकिन आप तो हमेशा जज बनने से मना करते रहे हैं, लेकिन इसकी लांचिंग पर सबसे ज्यादा उत्साहित आप ही थे?

अब ऐसे रियाल्टी शोज में होने वाली अराजकताओं के चलते मैं नहीं चाहता था कि मैं कभी किसी शो में जज बनूंगा। मैं समझता हूँ कि मैं तो खुद अभी सीखने की प्रिाया से गुजर रहा हूँ तो भला मैं किसी की प्रतिभा का जज कैसे हो सकता हूँ? लेकिन मुझे लगता है कि यदि सब मेरी तरह सोचेंगे तो आने वाली पीढ़ी का क्या होगा? सो मैं अपने कर्तव्य को पूरा करने के लिए इसमें शामिल हो गया।

जैसे आप स्पीलबर्ग के हॉलीवुड वाले काम में शामिल हो गए?

हंसते हैं, नहीं। उसके लिए मुझे काफी मेहनत करनी पड़ी, लेकिन जब मैंने उन्हें अपना गीत भेजा तो मैं हैरान था कि उन्होंने बिना किसी परिवर्तन के उसे वैसे ही स्वीकार कर लिया। इसे वे एक समारोह के दौरान होने वाले दृश्य में बतौर लोकगीत इस्तेमाल कर रहे हैं। मैं इसे सिंगापुर में रिकॉर्ड कर रहा हूँ।

कहा जाता है कि आपके साथ जज बने इस्माइल दरबार ऐसे नहीं हैं। वे तो किसी को भी आसानी से स्वीकार नहीं करते?

यह सच नहीं है। मैंने भी उनके बारे में काफी सुना है, पर आपको पता नहीं उन्होंने अपने कॅरियर का सबसे बेहतरीन गीत भी मेरे साथ ही रिकॉर्ड किया है, जो अभी आएगा। यदि ऐसा होता तो वे कभी अपने सहायक रहे मोंटी शर्मा के साथ जज नहीं बनते। वे केवल सही कहते हैं और मैं खुश हूँ कि मैं उनके साथ काम कर रहा हूँ।

फिर भी आप ऐसे बाजार के आदमी नहीं हैं?

मैं नहीं मानता कि मैं किसी बाजार में काम कर रहा हूँ। मैं अपना काम कर रहा हूँ। मैंने अपने कॅरियर का पहला गीत कर्मा में गाया और उसके बाद खिलाफ ऐसी फिल्म थी जिसने मुझे लोगों तक पहुंचा दिया लेकिन उसके बाद मैंने जो गीत लिखे और गाए या संगीत दिया वे लोगों ने प्रेम से स्वीकार किए। मैं नहीं जानता था कि लोगों से मुझे इतना प्यार मिलेगा।

ऐसे शोज में होने वाली ज्यादतियों के बारे में क्या कहते हैं? अब जजों का भी वह रुतबा नहीं रहा। वरिष्ठ जजों को लेकर अब कुछ भी कहा जा सकता है?

मैं इससे दु:खी होता हूँ। जब ऐसे शो अरम्भ हुए थे तो वे प्रतिभा और प्रतिष्ठा के प्रतीक थे लेकिन अब वे जिद और अहंकार का प्रतीक बन गए हैं। संगीत हमेशा सीखते रहने की प्रिाया है। मैंने खुद इसमें शामिल होने वाले प्रतियोगियों से बहुत कुछ सीखा है। इसमें इस बार करीब चौबीस प्रदेशों से प्रतियोगी आए हैं। ऐसे में मैंने खुद उनके लोकगीतों और परम्पराओं के बारे में जाना है।

आप जैसे गायक को केवल सूफी या लोकगीत गाने वालों में ही शुमार किया जाता है?

ऐसा नहीं है। मैंने जब छैयां-छैयां गाया तो लोगों का नजरिया था कि मैं केवल एक ही तरह के गीत गा सकता हूँ। लेकिन मैंने चक दे इंडिया तक जो गीत गाए या जिन फिल्मों में संगीत दिया उसके चलते अब लोग ऐसा नहीं सोचते। मेरा ख्याल है कि मैंने करीब सौ गीत गाए होंगे लेकिन सब अलग थे।

सुना है इसीलिए आप रहमान के साथ भी एक अलग प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं?

रहमान मेरे खुद के बहुत पसंदीदा संगीतकार हैं। मैंने उनके साथ काम करते हुए बहुत कुछ सीखा है सो इस बार हम दोनों फिल्मी अलबम से अलग एक नया अलबम लेकर आ रहे हैं। यह इस साल के अंत तक आ जाएगा।

 

– सुखविंदर सिंह

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