अमेरिका को भी धोखा दे रहा है पाकिस्तान

पाकिस्तान में फौजी सैनिक सत्ता समाप्त होने के पश्र्चात लोकतांत्रिक सरकार के रवैये ने कई प्रश्न खड़े कर दिए हैं। अमेरिकी राष्टपति पद के विजयी हुए उम्मीदवार बराक ओबामा ने पहले ही कह दिया था कि आतंकवाद को समाप्त करने के लिए अमेरिकी सहायता का पाकिस्तान ने व्यापक दुरुपयोग किया है। पाकिस्तान अलकायदा, तालिबान तथा अन्य कट्टरपंथी आतंकवादियों की शरण स्थली बन चुका है।

अमेरिकी सहायता का बड़ा भाग पाकिस्तान ने भारत में आतंकवाद फैलाने, आईएसआई और आतंकवादी संगठनों पर खर्च किया। अफगानिस्तान में अलकायदा और तालिबान के विरुद्घ अमेरिका का संघर्ष जारी है। लेकिन सच्चाई यह है कि पाकिस्तान ने गुप्त ढंग से अलकायदा और तालिबान को पाकिस्तान में सुरक्षित ठिकाने बनाने का मौका दिया है। इसी कारण अलकायदा का नेतृत्व अभी तक बचा हुआ है और तालिबान भी धीरे-धीरे पुनः शक्तिशाली बनता जा रहा है। पाकिस्तानी सेना और आईएसआई, अफगानिस्तान और भारतीय कश्मीर में आतंकी गतिविधियों के लिए अलकायदा और तालिबान का प्रयोग कर रही है। अमेरिका के राजनीतिक मामलों के अवर सचिव निकोलस बर्न्स ने भी कहा है कि पाकिस्तान के अंदर अलकायदा के ठिकानों पर हमले करने से अमेरिका कतई नहीं हिचकिचाएगा। हम पाकिस्तान सरकार के आतंकवाद के विरुद्घ लड़ने पर संदेह नहीं कर रहे, लेकिन हम चाहते हैं कि पाकिस्तान सरकार आतंकवादियों के विरुद्घ संघर्ष और तेज करे। अमेरिका आतंकवाद को समाप्त करनेे की ओर लगा हुआ है। अलकायदा के बड़े नेता क्वेटा व अन्य कबाइली क्षेत्रों में शरण लिये हुए हैं। अलकायदा ने पाकिस्तान के केंद्र शासित कबाइली क्षेत्रों में सुरक्षित शरण ली हुई है, जबकि तालिबान क्वेटा में खतरनाक मंसूबों को अंजाम देने में लगा हुआ है।

इधर, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री गिलानी ने माना है कि शांति और सुरक्षा के लिहाज से कट्टरवाद और आतंकवाद देश के लिए सबसे बड़ा खतरा है। लोगों में सुरक्षा की भावना पैदा करने के लिए कट्टरवाद और आतंकवाद को समाप्त करना ़जरूरी है। ब्रिटेन के विदेश-मंत्री पिलीबैड़ ने चेतावनी दी है यदि पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सरकारें आतंकवाद विरोधी मोर्चे पर एक-दूसरे का सहयोग नहीं करती, तो दोनों देशों में लोकतंत्र पुनः खतरे में पड़ सकता है। यदि दोनों देशों की सीमाओं पर आतंकवादी खतरे बरकरार रहे, तो पाकिस्तान में लोकतंत्र की सफलता के मौके बहुत कम हो जाएँगे। दोनों देशों को साझी रणनीति बनानी चाहिए। अफगानिस्तान में सीमा पार अर्थात पाकिस्तान का अस्थिर बने रहना- अमेरिका के लिए चिंताजनक है। अमेरिका के उप राष्टपति डिक चेनी ने कहा है कि पाकिस्तान आतंकवाद का अड्डा बन चुका है।

आतंकवाद के विरुद्घ सख्ती बरतने के अतिरिक्त और कोई उपाय नहीं है। पाकिस्तानी गुप्तचर एजेंसी आईएसआई के इशारे पर कट्टरपंथी लोग अमेरिका के विरुद्घ आवाज उठा रहे हैं और अमेरिका को इस्लाम का दुश्मन करार दे दिया गया है। पाकिस्तानी सेना और आईएसआई जिस ढंग से अलकायदा और तालिबान की मदद कर रही है, उससे लगता है कि पाकिस्तान स्थिर राष्ट नहीं रह सकता। अमेरिका ने पाकिस्तान को अफगानिस्तान में सोवियत संघ से लड़ने हेतु मुजाहिदीनों के लिए जो शस्त्र दिये थे तथा बाद में अलकायदा और तालिबान के विरुद्घ जो सहायता दी, उसमें से अधिकांश हथियार और धन उसने आतंकवादियों को ही दे दिया। ऐसा लगता है कि पाकिस्तान फौज के कट्टरपंथी तत्व और आईएसआई अपनी फितरत छोड़ने को तैयार नहीं हैं।

न्यूयार्क टाइम्स ने लिखा है कि अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को आतंकवाद विरोधी संघर्ष में 5 अरब डॉलर फौजी शक्ति बढ़ाने के लिए दिए गये थे, उसका खुल कर दुरुपयोग किया गया। अब अमेरिका के रक्षा विशेषज्ञ डेनियल मार्क का कहना है कि पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों की ़खामियों को देखते हुए आतंकवाद के विरुद्घ अभियान का कारगर होना संदेहपूर्ण है। जिन खुफिया एजेंसियों पर आतंकवाद विरोधी अभियानों की जिम्मेदारी टिकी है, उन्हीं पर चोरी-छिपे आतंकवादियों की सहायता पहुँचाने के आरोप लग रहे हैं। उनका मानना है कि ओसामा बिन लादेन और उसके समर्थक पाक के सरहदी क्षेत्रों में पनाह लिये हुए हैं, लेकिन अमेरिकी सैनिकों के यहॉं हमले पर पाकिस्तान को कड़ा एतराज है।

अमेरिकी सेनाओं की ओर से पाकिस्तान के कबाइली क्षेत्र में लगातार हवाई हमलों से भारी असंतोष पनपने लगा है। पाकिस्तान में आतंकवादी प्रशिक्षण केंद्र बंद किए जाने के प्रश्र्न्न पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कहा कि इस काम के लिए 9000 सैनिकों को तैनात किया गया है। इस अभियान में 400 से भी ज्यादा सैनिक मारे जा चुके हैं। आतंकवादी संगठनों के तीन चौथाई नेताओं को गिरफ्तार किया जा चुका या मारा जा चुका है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मुद्दों का हल भी होना चाहिए। कश्मीर विवाद का प्रभाव पाकिस्तान पर पड़ता है। उन लोगों पर भी प्रभाव पड़ता है जो अलकायदा या तालिबान या समाज के कट्टरपंथी लोगों के साथ मिलकर कश्मीर में सिाय रहना चाहते हैं। हमें लगता है कि कश्मीर समस्या का समाधान निकलेगा। पाकिस्तान कश्मीर में अमन-शांति कायम रखने के लिए विसैन्यीकरण का हिमायती है। अब पाकिस्तान, अमेरिका को आँखें दिखाने लगा है।

दक्षिणी वजीरिस्तान में अंगूर अड्डा गॉंव में अलकायदा के संदिग्ध अड्डे पर धावा बोलने आए अमेरिकी हैलीकाप्टरों पर पाकिस्तानी फौज ने गोलाबारी की, जिसके कारण उन्हें वापिस लौटना पड़ा। पाक के कबाइली क्षेत्रों के अलकायदा और तालिबान के लिए सुरक्षित पनाहगार बन जाने से अमेरिक ने अपना धैर्य खो दिया है। वजीरिस्तान में अमेरिकी सेना के हमलों से 20 लोग मारे गए थे। एक सुरक्षाकर्मी ने पाकिस्तानी सीमा के भीतर अमेरिकी बख्तरबंद गाड़ियों के प्रवेश की बात कही। पाकिस्तानी सेना के प्रमुख जनरल अशफाक कियानी ने कहा है कि देश की संप्रभुता का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पाकिस्तानी सेना को जवाबी हमला करने का आदेश दिया गया। ऐसा लगता है कि भविष्य में अमेरिका और पाकिस्तान के संबंध और बिगड़ेंगे।

 

– ज्योति आनंद

 

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