अर्ज करू अजमालणी रा रामा भजन

अर्ज करू अजमालणी रा रामा
काल कुब्द रा हेरा टाल॥ टेर ॥
सारदा माता तोने सुमिरू
गर्वा गनपति लागु पाय
तो सुमिर्या रोजी रिजक पर्दो
भुला अक्षर देवो बताय
पश्‍चिम देशपीरा रा थाणा
अजवी आवे थारी जात
लाडु चोखा चढ़े चुरमा
सोही आवे पीरा रे दाय
भर भादवे थारे मेलो भारेजे
नवँ खंड आवे थारी जात
आन्धा ने थे आंख्या देवों
पागला ने दोनों धणों पाव
किस्तुरी पुजा चढ़े अगर
धुप आरती उतार
डुबत जाहाज बोहिला ने
लारीयों सोही पीरा दियो है लार
अनन्त सिद्धा रे चरणों आया
शरण लिवी पीरा री छाप
गुरु खिवजी रे शरणे लिखमों
बोले परतिज्ञा बाने री पाल
अर्ज करू अजमाल जीरा रामा

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