आतंक को मूल से मिटायें

आजकल आये दिन देश में कहीं न कहीं बम धमाके हो रहे हैं। देश में, शहर में तथा घर के आसपास कहीं भी, कुछ भी हो सकता है। पुलिस तथा टी.वी. वाले हर ब्लास्ट के पीछे उनके मास्टर माइंडों की पहचान करतै हैं। प्रश्न है, आज तक कितने मास्टर माइंडों को फांसी हुई और कितनों को मार गिराया गया? जनता पुलिस, प्रशासन व टी.वी. वालों से जानना चाहती है। संबंधित विस्फोटों के दोषियों को जब तक कड़ी से कड़ी सजा नहीं मिलेगी तब तक इन धमाकों पर काबू नहीं पाया जा सकता। अगर इन धमाकों के पीछे किसी तरह की राजनीति अथवा कोई नेता है तो टी.वी. वालों को चाहिये कि वे वैसे नेताओं को जनता के सामने लायें और जनता के सामने उनको ऐसा नंगा करें कि उसका चरित्र तथा चित्रण ऐसा साफ हो जाये कि वह आगे की जिंदगी में वैसी राजनीति करना ही भूल जाये और वह दूसरों के लिए भी सबक बने। ऐसे लोगों को त्वरित अदालत के जरिये फॉंसी की सजा मिलनी चाहिए।

बेगुनाह नागरिकों को इस तरह मारना एक राष्टद्रोही कार्य है। वैसे भी राष्टद्रोही लोगों को खुलेआम छोड़ना राष्ट के साथ गद्दारी करने जैसा है। अतः खोज करें उनकी कि कौन हैं वे लोग जो राष्ट के साथ इस प्रकार गद्दारी कर रहे हैं। निश्र्चित ही इन सबके पीछे कोई बड़ी राजनैतिक ताकत होगी अथवा ऐसे किसी अन्तर्राष्टीय षड्यंत्र में हमारे ही देश का कोई संदिग्ध व्यक्ति देश के साथ गद्दारी कर रहा होगा। जब तक ऐसे गद्दारों को नहीं मिटाया जाएगा, यह बीमारी देश से खत्म नहीं होगी।

-पूनम जोधपुरी (हैदराबाद)

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