कपिल मुनि की तप-स्थली है कौल

हरे-भरे वनों तथा शांत प्राकृतिक वातावरण के चलते हरियाणा प्रदेश ऋषियों व मुनियों की तप व साधना स्थली रहा है। यहां महर्षि वेदव्यास, कश्यप, विश्र्वामित्र, वशिष्ठ, गौतम, पाराशर, अत्री व कपिल मुनि सहित अनेक ऋषियों ने तपस्या की है।

कैथल जनपद का एक प्राचीन तीर्थ-स्थल है, कील। यह स्थल कपिल मुनि से संबंध रखता है। गांव के भीतर बसा है कपिल मुनि सरोवर स्थल। इस तीर्थ का वर्णन वामन पुराण में भी है। कपिल मुनि सांख्य शास्त्र के रचयिता व भगवान के अवतार थे। मान्यता है कि ऋषि कर्दम व देवहूति को स्वयं ब्रह्म जी ने कपिल मुनि के जन्म की सूचना दी थी। हरियाणा में कपिल मुनि के दो तपस्या स्थल प्रमुख हैं, कलायत व कौल। कपिल मुनि तीर्थ पर विस्तृत क्षेत्र में लगभग 15 फुट गहरा सरोवर है। सरोवर के मध्य महान योगी संत बद्री नारायण जी की समाधि बनी है। इस समाधि तक पहुँचने हेतु पुल बना है। इस समाधि पर दूध चढ़ता है।

कपिल मुनि तीर्थ पर 10 प्राचीन कलात्मक घाट बने हैं। इनमें से तीन घाट महिलाओं हेतु आरक्षित हैं। कपिल मुनि के सरोवर तट पर प्राचीन शिव मंदिर है, जो लगभग 25 फुट ऊँचे स्थापित है। इसमें शिव-पार्वती, हाथी की तस्वीर, साधु-संतों व वृक्ष तले कृष्ण-रास व शेष नाग शय्या वाले प्राचीन भित्तिचित्र बहुत सुंदर हैं। यहां हनुमान जी का प्राचीन मंदिर है। सरोवर के तट पर प्राचीन मंदिर भी बना है। इसकी छत्त पर सुंदर चित्र बने हैं। इनमें वाराह अवतार, नरसिंह अवतार, पूतना-वध, कृष्ण-रास, विष्णु-दानव युद्घ, तपस्या में रत ऋषि, अश्र्व व सुंदर फूल-पत्तियां बनी हैं। गांव के बाहर गढ़ रथेश्र्वर मंदिर है। इसके सामने का क्षेत्र दलदला है तथा यह कभी भी सूखता नहीं है। वामन पुराण में वर्णित कौल तीर्थ प्राचीन व दर्शनीय तीर्थ है।

– अतुल कुमार शर्मा

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