कैसे काम करता है पैराशूट

दोस्तों, तुमने पैराशूट से लोगों की यात्रा के बारे में तो सुना ही होगा और टीवी पर या फिल्मों में इसके सहारे लोगों को लैंडिग करते हुए भी देखा होगा। क्या तुम जानते हो कि पैराशूट का आविष्कार कब और कैसे हुआ?

नहीं? तो चलो हम आज पैराशूट के बारे में ही बात करते हैं। पैराशूट लगभग गुब्बारे के सिद्घांत पर ही काम करता है। यही कारण है कि दोनों का आविष्कार साथ ही हुआ। इसके प्रदर्शन में ाांस के रहने वाले लुई सेबेस्तीन लेनोरमंड 1783 में कामयाब रहे थे।

वह पैराशूट बॉंधकर एक ऊँची मीनार से कूदे और सही सलामत नीचे आने में सफल रहे। शुरू में पैराशूट कैनवास के बनाए गए। फिर बाद में इन्हें बनाने के लिए सिल्क का प्रयोग होने लगा। आजकल पैराशूट नायलोन के बनते हैं। 1912 में पहली बार हवाई जहाज से पैराशूट की मदद से कूदने वाले व्यक्ति अमेरिकी सेना के कप्तान अलबर्ट बेरी थे।

पैराशूट का सिद्घांत –

किसी भी गिरती हुई चीज पर दो बल एक साथ काम करते हैं-हवा का प्रतिरोध बल व गुरुत्वाकर्षण बल। गुरुत्वाकर्षण बल चीज को तेजी से नीचे की ओर खींचता है, लेकिन हवा का प्रतिरोध इसे गिरने से रोकता है। जैसे-जैसे गिरने वाली चीज का वेग बढ़ता जाता है, वायु प्रतिरोध बल भी बढ़ता जाता है। इस ाम में गिरती चीज उस वेग तक पहुँच जाती है जिसे स्थिर वेग कहते हैं। यहॉं वायु प्रतिरोध और गुरुत्वाकर्षण बल बराबर हो जाते हैं। गिरने वाली चीज का वेग स्थिर हो जाता है। चौड़ी चीजों पर नुकीली चीजों की अपेक्षा वायु प्रतिरोध अधिक होता है। इसलिए थाली की तरह बनी चीजें स्थिर गति तक जल्दी पहुँच जाती हैं। जैसे ही पैराशूट खुलता है, मनुष्य के गिरने का वेग अचानक कम हो जाता है, जिससे मनुष्य को ़जोर का झटका लगता है।

पैराशूट लगभग 5 मीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से नीचे उतरता है। लेकिन धरती से कम ऊँचाई से यानि 150 मीटर से कम की ऊँचाई से कूदा जाए तो यह खतरनाक हो सकता है, क्योंकि इतनी कम ऊँचाई से कूदने पर पैराशूट खुल नहीं पाता। पैराशूट से उतरने वाला व्यक्ति अपनी दिशा को पैराशूट में लगी रस्सी खींच कर नियंत्रित कर सकता है।

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