कॉलिंग में कॅरियर

अगर आपसे आपका कोई जानकार कहे कि वह हर महीने 25 हजार रुपये की नौकरी करता है। लेकिन उसकी शैक्षणिक योग्यता महज स्नातक ही है या अभी स्नातक कर ही रहा है, वह भी किसी सामान्य विषय पर, तो आप क्या सोचेंगे? सोचेंगे कि हांक रहा है? आज के 10 साल पहले अगर कोई यह कहता तो निश्र्चित रूप से वह लम्बी-चौड़ी हांक ही रहा होता। भले ही 15 हजार की बजाए तब वह अपनी सैलरी 5 हजार ही क्यों न बता रहा होता। मगर आज यह सच भी हो सकता है।

जी हां, बिना ग्रेजुएशन किए या साधारण विषयों में ग्रेजुएट करने वाले छात्रों को भी आज 15 से 20 हजार रुपये मासिक की शुरुआती नौकरी आसानी से मिल सकती है। बशर्ते, अंग्रेजी भाषा में उनकी शानदार पकड़ हो, धाराप्रवाह ढंग से अंग्रेजी बोल लेते हों और आवाज अच्छी हो, उच्चारण साफ-सुथरा हो तथा उच्चारण का लहजा बड़े शहरों वाला और ग्लोबल हो। ऐसे तमाम लोगों के लिए बीपीओ यानी बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्स या और सामान्य शब्दों में कहें तो कॉलसेंटर के दरवाजे हर समय खुले हैं। इस समय देश में तकरीबन 16 लाख लोगों को बीपीओ क्षेत्र में नौकरी मिली हुई है और अगर आईटी तथा आईटी़ज क्षेत्र को मिला दें, तो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर नौकरी हासिल करने वाले लोगों की कुल तादाद बढ़कर 1 करोड़ 60 लाख पहुंच जाती है। बीपीओ क्षेत्र देश में राजस्व पैदा करने का कितना बड़ा क्षेत्र बन गया है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बीपीओ इंडस्टी 60 अरब डॉलर या 2 लाख 67 हजार 526 करोड़ रुपये का आंकड़ा छू रही है।

नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर सर्विस कंपनी़ज (नैस्कॉम) के मुताबिक आईटी क्षेत्र लगातार विकास कर रहा है और अगले 10 सालों तक इस क्षेत्र में विकास की दर जारी रहेगी, भले ही वह कुछ कम होती जाए। सबसे बड़ी बात यह है कि आईटी क्षेत्र का अंतर्राष्टीय परिदृश्य कुछ और कहानी कहता है, लेकिन भारत में इसका कुछ और ही जलवा है। हमारे यहां बीपीओ सेक्टर 18 फीसदी की दर से लगातार विकास कर रहा है और अगर इस क्षेत्र के भीतर भी कुछ खास विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों को देखें, तो उनमें विकास की यह दर 200 फीसदी तक है।

कुल मिलाकर ये तमाम बातें यह बताने के लिए काफी हैं कि भारत का आईटी क्षेत्र और आईटी क्षेत्र से संबंधित बीपीओ क्षेत्र नौकरी के लिए फिलहाल गारंटी जैसा है। जिस किसी को भी अच्छी अंग्रेजी आती है, उच्चारण अच्छा है, टेलीकम्युनिकेशन में कुशल है तो उसे नौकरी की गारंटी है। पहले इसके दरवाजे सिर्फ बड़े शहरों के सिर्फ उन हाईफाई स्कूलों और कॉलेजों के छात्रों के लिए ही खुले थे, जो अंग्रेजीदां माने जाते थे। मगर अब बीपीओ का क्षेत्र सिर्फ बड़े शहरों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देश के दूसरे दर्जे के शहरों की तरफ भी तेजी से बढ़ा है। पुणे, लखनऊ, इंदौर, चंडीगढ़, आगरा जैसे शहरों में भी अब तेजी से कॉलसेंटर खुल रहे हैं। इसके साथ ही हिंदी तथा कुछ प्रदेशों में तो प्रादेशिक भाषाओं में भी कॉलसेंटर भी खुल रहे हैं यानी सिर्फ अंग्रेजी ही नहीं बल्कि भारतीय भाषाओं में भी जिनको अधिकार हासिल है, उनके लिए भी इस क्षेत्र में बहुत तेजी से जगह बन रही है।

बीपीओ क्षेत्र का मतलब सिर्फ कॉलसेंटर ही नहीं है, बल्कि इसमें भी कई श्रेणियां हैं और उन अलग-अलग श्रेणियों के लिए अलग-अलग वेतन और अलग-अलग जॉब स्तर की सुविधाएं हैं। बीपीओ के क्षेत्र में जो चार प्रमुख श्रेणियां हैं उनमें बैक ऑफिस, कस्टमर कांटेक्ट, कार्पोरेट सपोर्ट तथा आर एंड डी प्रमुख हैं। बैक ऑफिस बीपीओ के क्षेत्र की प्रारंभिक सीढ़ी है। बैक ऑफिस में इंटरनेट के जरिए सैकड़ों मील दूर बैठे कॉलसेंटर के कर्मचारी कंपनियों के डाटा एंटी, डेट एंटी, डाटा कनवर्जन (टांसलेशन और टंासिाप्शन), बेसिक प्रोसेसिंग, डाक्युमेंट मैनेजमेंट, स्टोरेज जैसे काम करते हैं। यह बहुत साधारण काम होता है। इसमें किसी खास शैक्षणिक योग्यता की जरूरत नहीं होती है। उम्मीदवार को साधारण ग्रेजुएट होना चाहिए, किसी भी विषय से। बैक ऑफिस में मासिक वेतन 10 से 15 हजार रुपये तक मिलते हैं। दूसरी श्रेणी के तहत कस्टमर कांटैक्ट काम करने वाले लोग आते हैं। इसके तहत फोन में ग्राहकों द्वारा मांगी गयी जानकारियां देना, उनकी शिकायतें सुनना, उन्हें नोट करना, किसी खास प्रोडक्ट के बारे में बताना, उसे बेचना, ऑर्डर हासिल करना, ऑर्डर पहुंचा या नहीं आदि बातों की पुष्टि करना तथा कैटलॉग बेचना जैसी चीजें शामिल होती हैं। इसके अलावा कई जगहों पर पेमेंट कलेक्शन का काम भी इसके जरिए होता है तो कई जगहों पर पेमेंट के लिए रिमाइंड करने का भी काम होता है। इसमें अच्छी बोल सकने वाली अंग्रेजी की जरूरत होती है, साथ ही अंग्रेजी की संवाद कला में भी माहिर होने की जरूरत पड़ती है। इस क्षेत्र में कुछ खास विशेषज्ञता वाले उम्मीदवारों की जरूरत पड़ती है। मसलन, अंग्रेजी में संवाद करने की क्षमता के अलावा यहां फायनेंस, बायोटेक, इंजीनियरिंग और टेक्नो क्षेत्र के जानकार लोगों की दरकार काफी ज्यादा होती है ताकि वे ग्राहकों को जरूरी सूचनाएं दे सकें और उनकी जिज्ञासाओं को शांत कर सकें। यहां सैलरी की शुरुआत 11 हजार रुपये प्रतिमाह कम से कम होती है।

बीपीओ के क्षेत्र में तीसरी श्रेणी कार्पोरेट सपोर्ट करने वालों की होती है। ये ऐसे लोग होते हैं, जो एकाउंट, फायनेंस, एचआर आदि में माहिर होते हैं और नियमित रूप से किसी कंपनी की इन जरूरतों को इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के जरिए पूरी करते हैं। इसके अलावा यहां नॉलेज सपोर्ट की भी जरूरत पड़ती है, जो सेवाओं के विश्लेषण, एप्लीकेशन प्रोसेसिंग, रिस्क मैनेजमेंट आदि की विशेषज्ञता वाले होते हैं। इस क्षेत्र में खास क्वालिफिकेशन की जरूरत पड़ती है, जो ग्रेजुएशन स्तर से लेकर पी.एच.डी. तक हो सकती है। बीपीओ क्षेत्र की अंतिम और सबसे खास श्रेणी है रिसर्च एंड डेवलपमेंट यानी आर एंड डी। यह बीपीओ का अंतिम सिरा है। यहां वास्तव में ऐसे जिम्मेदार लोगों की जरूरत होती है, जो अपने-अपने क्षेत्र में नये क्रिएशन कर सकें। इस श्रेणी के लिए इंजीनियरों, डिजाइनरों खासतौर पर ग्राफिक डिजाइनरों, कांटेंट डेवलपमेंट विशेष तौर पर एनिमेशन वेबसाइट्स और ग्राफिक्स तथा प्रोडक्ट डिजाइनरों की जरूरत पड़ती है। यह श्रेणी अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों की दरकार रखती है। आमतौर पर बी.टेक., बी.एस.सी., एम.फिल, पी.एच.डी. जैसी शैक्षणिक योग्यता रखने वाले इस श्रेणी के लिए उपयुक्त उम्मीदवार होते हैं। बीपीओ की इस तीसरी और चौथी श्रेणी के लिए कोई निश्र्चित वेतन नहीं है। अलग-अलग काम, अलग-अलग विशेषज्ञता, अलग-अलग जरूरत के हिसाब से मासिक वेतन भी मिलता है, मगर यह न्यूनतम तीसरी श्रेणी के लिए 25 हजार और चौथी श्रेणी के लिए 30 हजार होता है। बीपीओ क्षेत्र के लिए प्रशिक्षण देने वाले कुछ प्रमुख संस्थानों की सूची इस प्रकार है-

  • बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस, पिलानी
  • जवाहर लाल नेहरू टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी, हैदराबाद
  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (सभी छः)
  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी

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