गणेश चतुर्थी

रिद्धी-सिद्धि गजवदन विनायक मंगल कर्ता
देव दनुज के, और मनुज के नौ निधि भर्ता

बिना गणेशजी के तो सारे ही काम अपूर्ण है, कितना भी मुश्किली काम हो, गणेश जी का नाम लेते ही आसान हो जाता है।स्वयं भगवान गणेश जी को बारात में नहीं लेकर गये तो उनका रथ नहीं हिला गणेश जी को मानकर साथ में ले गये पहले रिद्धि-सिद्धि के साथ गणेशजी की शादी हुई उसके बाद भगवान को लक्ष्मी जी मिली यानि गणेशजी के बिना तो भगवान भी अधुरे है उन्ही गणेशजी ने भाद्रशुक्ला चतुर्थी को अवतार लिया।

आज के दिन हम गणेश जी को स्नान करवाकर दूब, फूल, चन्दन, मोली, कुंकु चावल, गुड से श्री गणेशजी की पूजा करते है। सवा बारह बजे गणेश जी की आरती करते है। इक्कीस चुरमे के लड्डु बनाकर गणेशजी के भोग लगाते है, चुरमे के लड्डु की विधि चैत्रमास में लिखी है। गणेश जी के चुरमे में थोडा सा गुड डालते है।

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