गनपत देव सेव थारी साची सेवा भजन

गनपत देव सेव थारी साची सेवा
राजी थो होय देवों समझ घणी
रामा कवरणी रा चरण परस्ता
शरणे आया री भाली रे बनी
टेरा अर्ज करू अजमालणीरा रामा
शायल सुनों नी नकिलंग अवलाई
संकट मेट मारा रामा धणी गाटेर॥
दुःख मेटन दुमीया रा देवा
सामल साद समन्दा सुनी
डुबत जाहाज लगायो हर बेडो
साथ करी थारा भक्ता थनी॥ टेर ॥
पेट वाली पिंड पिरणी मेटो
दुर्भल री पुकार सुनी
बदमत थनो रे जिवायों हर बालों
प्रसन्न होय थारी कला रे बनी॥
भगवा भेष राज थारो बानों
मोर छाप मारा धणीया थनी
तवरा रा तिलक सन्ता रा हर तारण
सत्य सिवरीया हि आरोदा अनी
चाकर चुक गुणों रे भगसावों
नाकों नजर मापर मेंहर धणी
के माली लिखमो सुनो अजमालरी
सनमुख होम मारा हेलो सुनों

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