गूगल से चुटकुलों तक

दुनिया के 43 करोड़ से अधिक लोगों की इंटरनेट तक पहुँच हो चुकी है। अमेरिका और कनाडा इसमें काफी आगे हैं। दुनिया में जितने भी लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं उसमें से 41 प्रतिशत तो सिर्फ इन्हीं देशों के हैं। यूरोपीय

देशों में ब्रिटेन और जर्मनी इंटरनेट का इस्तेमाल करने

वाले देशों में आगे हैं। एशियाई देशों में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है, पर फिलहाल सबसे तेज रफ्तार से इसे अपनाने का तमगा दक्षिण कोरिया को मिला है। इंटरनेट कितनी तेजी से फैल रहा है, इसके लिए गूगल सर्व इंजन का उदाहरण दिया जा सकता है। गूगल के संस्थापक हैं लेरी पेज व सर्जेई बिन। सन् 1998 में जब उन्होंने यह कंपनी खोली थी तो इनका पहला दफ्तर कैलिफोर्निया के मेनलो पार्क में स्थित एक गैराज में खोला गया था। आज गूगल दुनिया का सबसे बड़ा सर्व इंजन है और सबसे ज्यादा लोग इसी पर भरोसा करते हैं। म़जे की बात ये है कि महज चार लोगों ने गूगल की शुरुआत की थी और अब इस पर वेब पन्नों की संख्या होश उड़ा देने वाली है। पूरे दो करोड़ 50 ह़जार! 1994 में इंटरनेट का फैलाव और इसकी गतिविधियों में 2200 प्रतिशत सालाना की दर से बढ़ोत्तरी हो रही थी। तभी तो कारोबारियों ने भी इस पर ध्यान दिया। एक किताब की दुकान कितनी बड़ी हो सकती है और वहां कितनी दुकानों का संग्रह मौजूद हो सकता है, आपने अगर बा़जार की किसी दुकान को देखकर अंदाजा लगाया हो, तो हो सकता है कि ऑनलाइन दुकान के मामले में आप पूरी तरह गलत साबित हों। बा़जार की छोड़कर इस ऑनलाइन बुकशॉप का जायजा लीजिए। 1994 में खुली थी ऑनलाइन बुकशॉप- “अमेजन डॉटकाम।’ यह 160 देशों के एक करोड़ 30 लाख लोगों को सेवा दे रही है और इंटरनेट की मेहरबानी है कि एक इंच भी जगह न घेरने वाली इस ऑनलाइन बुकशॉप पर चार करोड़ 70 लाख किताबें, सीडी, वीडियो आदि अपने ग्राहकों के लिए उपलब्ध हैं। इंटरनेट से लोगों के जुड़ाव का ही नतीजा है कि संदेशों के आदान-प्रदान के लिए भी इसका सबसे ़ज्यादा इस्तेमाल होने लगा है। ब्रिटेन की राजकुमारी डायना का निधन हुआ तो ब्रिटिश राजतंत्र की वेबसाइट पर शोक संदेश भेजने वालों की ़झड़ी लग गयी। करीब छः लाख लोगों ने इस वेबसाइट पर शोक संदेश भेजे थे। यह अपने आप में एक रिकॉर्ड है। हंसने-हंसाने के लिए भी नेट माध्यम का खूब इस्तेमाल हो रहा है। “लाफ लेब’ नाम से एक वेबसाइट लांच की गयी। इस पर लोगों को अपने मौलिक चुटकुले भेजने थे। चालीस ह़जार लोगों ने इस पर अपने चुटकुले भेजे और जब इनमें से सर्वश्रेष्ठ चुटकुला चुनने की बारी आयी तो लोगों का उत्साह और भी देखने लायक था। इसके लिए 21 लाख लोगों ने नेट पर अपना वोट दिया। यही रफ्तार अगर कायम रही तो आने वाले दिनों में विकसित देशों के साथ भारत जैसे विकासशील देशों में भी घरों में केबल की तरह इंटरनेट भी ऩजर आयेगा।

– बीना

One Response to "गूगल से चुटकुलों तक"

  1. rahul   December 25, 2015 at 6:56 pm

    sahi hai

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