टेलीकॉम क्षेत्र

अगर सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र को विकास करना है, अगर पर्यटन उद्योग को आगे बढ़ना है और सत्कार क्षेत्र में बूम लानी है तो यह सब कुछ बिना एक मजबूत टेलीकॉम अधिसंरचना के संभव ही नहीं है। टेली कम्युनिकेशन आज के जीवन की आधारभूत जरूरत है। चाहे सामान्य जीवन हो या खास, बिना टेलीफोनिक संचार के आज जीवन की कल्पना ही नहीं की जा सकती। मतलब साफ है कि अगर अर्थव्यवस्था को विकास करना है तो टेलीफोन क्षेत्र का विकास अवश्यंभावी है।

भारत सरकार दूरसंचार क्षेत्र में जबरदस्त निवेश के मूड में है। यूं तो दुनिया में सबसे तेज गति से जनसंचार का विकास भारत में ही हो रहा है, लेकिन अभी भारत में बहुत बड़ा ऐसा क्षेत्र मौजूद है जिसका विकास होना भी है। ग्रामीण क्षेत्र में अभी जनसंचार के विकास की जबरदस्त उम्मीदें हैं। इन सारी बातों का लब्बोलुआब यह है कि मौजूदा दौर में और आगे आने वाले कुछ सालों में टेलीफोन क्षेत्र का जबरदस्त विकास होगा, क्योंकि असली भारत में अभी भी संपर्क क्रांति का इंतजार है। निश्र्चित रूप से इस ाांति में बहुत बड़े पैमाने पर मानव संसाधनों की जरूरत पड़ेगी। एक अनुमान के मुताबिक आज की तारीख में इस क्षेत्र में जितना मानव संसाधन कार्यरत है ।

दूरसंचार के क्षेत्र में कई स्तरों पर मानव संसाधन की जरूरत पड़ेगी। ऑपरेटर के स्तर पर, प्रोफेशनल के स्तर पर, तकनीकी विशेषज्ञ के स्तर पर और बाजार व विपणन विशेषज्ञ के रूप में। सैमसंग मोबाइल के भारत प्रमुख सुनील दत्त कहते हैं, “”हर स्तर पर सकारात्मक संकेत हैं। मानव संसाधन की वृद्घि के संदर्भ में भी और राजस्व के स्तर में भी। अगले 5 सालों तक इस क्षेत्र में बढ़ोत्तरी ही होगी। किसी भी स्तर पर कमी दिखाई नहीं पड़ेगी।” विशेषज्ञ अगर ऐसा न भी कहें तो भी तथ्य इस बात की गवाही देते हैं कि दूर संचार क्षेत्र अकेला ऐसा क्षेत्र है, जहां पिछले कुछ सालों के अंदर वेतन सबसे ज्यादा बढ़े हैं। एक और भी बात है, यह अकेला क्षेत्र है जिसमें आज सबसे तेज तकनीकी उन्नति हो रही है और सबसे ज्यादा लाभ मिल रहा है।

भारत में फिलहाल 60 लाख टेलीफोन प्रतिमाह की दर से बढ़ रहे हैं। इसमें सभी तरह के टेलीफोन हैं, लैंडलाइन भी और मोबाइल भी। भारत में इस समय जितने टेलीफोन हैं, उनमें से 75 फीसदी के 2001 से 2006 के बीच कनेक्शन लिए गए हैं। 2007 तक हिन्दुस्तान में 25 करोड़ से ज्यादा फोन हो चुके थे और 2011 तक इनकी तादाद 50 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है। टेलीफोन क्षेत्र इंफ्रास्टक्चर विकास के दौरान भी रोजगार देता है और जब इसका विकास हो चुका होता है तो भी इसमें लगातार रोजगार उपलब्ध रहता है। हालांकि फिलहाल सबसे ज्यादा इस क्षेत्र के जिस हिस्से में विकास की उम्मीदें दिख रही हैं, वह हिस्सा उत्पादन और बाजार का क्षेत्र है। उपभोक्ताओं को दी जाने वाली सेवाओं से संबंधित क्षेत्र भी मानव संसाधन की खपत की दृष्टि से बहुत बड़ा क्षेत्र है।

टेलीफोन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर नेटवर्क इंजीनियरों की मांग है। साथ ही नेटवर्क योजनाकारों, बाजार विशेषज्ञों, ग्राहक सेवा संबंधी व्यवस्थापकों जैसे पदों के लिए भी बहुत बड़े पैमाने पर प्रशिक्षित कर्मचारियों की जरूरत है। यहां कुछ तो बिल्कुल नये पद उभर कर सामने आ रहे हैं, जो पारंपरिक टेलीकम्युनिकेशन क्षेत्र में पहले नहीं थे जैसे नेटवर्क मेंटेनेंस। जबसे बड़े पैमाने पर इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ी है तब से हर कंपनी ग्राहकों को दी जाने वाली अपनी नेटवर्क सुविधा को सवाल रहित बनाना चाहती है। जिस कारण नेटवर्क के मेंटेनेंस पर न सिर्फ ये कंपनियां अच्छा-खासा पैसा खर्च कर रही हैं, बल्कि उसकी उन्नत तकनीक के लगातार विकास में भी खूब पैसा खर्च कर रही हैं।

शायद यही वजह है कि तमाम विशेषज्ञ इस बात को मानते हैं कि आने वाले सालों में जितना इस क्षेत्र को विशेषज्ञों की दरकार होगी उतने उपलब्ध नहीं हो सकेंगे। नतीजतन, गैर तकनीकी पृष्ठभूमि वाले सामान्य स्नातकों के लिए भी इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में स्कोप है। मगर फिलहाल इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा ऐसे तकनीकी क्षेत्रों से स्नातकों की मांग है, जो संचार क्षेत्र की तकनीक के बारे में जानकारियां रखते हैं। टेलीकॉम इंजीनियरिंग तकनीकी लिहाज से अभी विकास के दौर में है और जिस तेजी से इस क्षेत्र का विकास हो रहा है, उससे उन पारंपरिक तकनीकी विशेषज्ञों को भी दबाव में आगे बढ़ना पड़ रहा है, क्योंकि इस क्षेत्र में नये लक्ष्य संचार तकनीक को ज्यादा से ज्यादा सरल बनाना है। बहरहाल, तकनीकी संस्थान इसकी लगातार सफल कोशिशों में जुटे हैं। एक टेलीकॉम मैनेजमेंट से स्नातक प्रोफेशनल को 6 से 8 लाख रूपये सालाना की नौकरी यहां बड़े आराम से मिल जाती है, जबकि सॉफ्टवेयर इंजीनियर 4 से 5 लाख रूपये सालाना से शुरूआत करते हैं, जिनकी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता बी.टेक इलेक्टॉनिक या इलेक्टिकल सॉफ्टवेयर है। जहां तक कस्टमर सर्विस में इस क्षेत्र की सामान्य सेलरी का सवाल है तो इसकी शुरूआत 7 से 10 हजार रूपये महीने ही है।

दूरसंचार क्षेत्र के लिए शैक्षणिक रूप से योग्य बनाने वाले देश के कुछ महत्वपूर्ण शैक्षिक संस्थान इस प्रकार हैं-

  • सिम्बॉयसिस इंस्टीट्यूट ऑफ टेलीकॉम मैनेजमेंट, पुणे
  • बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस, पिलानी
  • भारतीय स्कूल ऑफ टेलीकम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट, आईआईटी, दिल्ली
  • कोचीन यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एण्ड टेक्नोलॉजी, कोचीन
  • फैकेल्टी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, जाधवपुर यूनिवर्सिटी
  • डिपार्टमेंट ऑफ इलेक्टॉनिक्स एंड इलेक्टिकल कम्युनिकेशन, आईआईटी, खड्गपुर
  • डॉ. बाबा साहब अम्बेडकर टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी, लोनेरे, महारष्ट
  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बंगलौर

 

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