दिमाग में अस्थिरता रखता है चन्द्रमा व राहु का संयोग

अभिजीत नक्षत्र

शारीरिक गठन – मध्यम कद, चुम्बकीय व्यक्तित्व, दीप्तिमान आभास तथा मनोहर अभिव्यक्ति होती है।

स्वभाव एवं सामान्य घटना – जातक विद्वानों तथा अभिजात्य वर्ग में सम्मानित होता है। शिष्ट व्यवहार, धार्मिक, मृदुभाषी, महत्वाकांक्षी तथा आशावादी दृष्टिकोण वाला होता है। उसमें गुप्त विद्याओं को जानने की प्रवृत्ति होती है। प्रत्येक क्षेत्र में प्रसिद्घ होता है।

शिक्षा, रोजगार एवं व्यवसाय के साधन – जातक अपने परिवार में अति विद्वान, प्रसिद्घ तथा उच्च स्थान पर होगा। वह ऐसे कार्यों में होगा जिसमें शक्ति एवं अधिकार निहित होंगे। इस नक्षत्र में शनि भी स्थित हो तो मिश्रित व्यवसाय होगा तथा कार्य क्षेत्र या व्यवसाय में अक्सर बदलाव होता रहेगा। रोजगार के क्षेत्र में धर्म, शिक्षा, सरकारी संचालन, व्यापार, बिजली, इलैक्टोनिक्स, कम्प्यूटर, सीमेन्ट, सेनेटी आदि व्यवसायों से संबंध रखते हैं।

पारिवारिक जीवन एवं स्वास्थ्य – इनके एक से अधिक पत्नी होने के संकेत रहते हैं। विवाह 23 वर्ष की आयु के आस-पास होता है। परिवार नियोजन नहीं अपनाने की वजह से अधिक संतान का योग रहता है। 27 वर्ष की आयु तक आर्थिक समस्याएँ रहती हैं, उसके बाद धन की कमी नहीं रहती। बचपन में स्वास्थ्य खराब रहता है। उसके माता-पिता भी इस कारण चिन्तित रहते हैं। 20 वर्ष की आयु के बाद स्थिति में सुधार होता है। रोगों में अक्सर पीलिया, बवासीर, शुगर, गाऊट, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप आदि होने की सम्भावना रहती है।

स्त्री जातक – लम्बा चेहरा, पतला शरीर, लम्बे पांव तथा आकर्षक व्यक्तित्व होता है। 16 वर्ष तक मोटी तथा अपरिपक्व होती हैं। 18वें वर्ष में अचानक किसी घटना के कारण परिपक्वता आती है तथा जीवन के महत्व का पता चलता है। ये उत्तम कार्यकारी योग्यता वाली होती हैं तथा एक समय में कई काम निपटाने की क्षमता रखती हैं। मालिक एवं सेवक में भेद नहीं मानती तथा उद्यम से यथेष्ट धन कमाती हैं। आशावादी एवं महत्वाकांक्षी दृष्टिकोण के कारण स्वयं जीवन बनाती हैं। कई केसों में 12 से 14 वर्ष की अवस्था में बलात्कार का शिकार होने के कारण पुरुष वर्ग से घृणा करती हैं तथा देर से शादी करती हैं। इनका वैवाहिक जीवन अच्छा रहता है। बचपन में स्वास्थ्य खराब रह सकता है। काली खांसी, दमा, गठिया, त्वचा के रोग आदि हो सकते हैं। 15-16 वर्ष तक का समय कुछ अच्छा नहीं होता। 18वां वर्ष पार करने के बाद कोई चिन्ता की बात नहीं रहती।

 

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