धूम मचाती महिलाएं

हम सभी जानते हैं कि स्कूली परीक्षा में लड़कियां लड़कों से बेहतर अंक ला रही हैं। पुरुषों की तुलना में महिलाएं ज्यादा यूनिवर्सिटी डिग्री हासिल कर रही हैं और अधिकतर नये जॉब्स को महिलाएं ही भर रही हैं। लेकिन इस सबका अर्थ क्या है? एक ऐसी दुनिया जहां महिलाओं का राज है या दूसरे शब्दों में अच्छा अर्थशास्त्र। विश्र्व अर्थशास्त्र का भविष्य ज्यादा से ज्यादा महिलाओं के हाथों में जा रहा है। आज महिलाएं ग्लोबल विकास की सबसे शक्तिशाली इंजन हैं।

कार्यबल में अधिक महिलाओं का होना न सिर्फ उनके प्रति इन्साफ है बल्कि यह व्यापार के लिए भी अच्छा है। महिला रोजगार में वृद्घि से ग्लोबल ग्रोथ को जबरदस्त सहारा मिला है। हिसाब करने पर मालूम हुआ है कि अतिरिक्त महिलाओं को रोजगार देने से न सिर्फ जीडीपी में वृद्घि हुई है बल्कि पूंजी निवेश में भी भारी इजाफा हुआ है और इस तरह उत्पादन में बढ़ोत्तरी हुई है। विश्र्व का आर्थिक विकास एक अलग दिशा में ऊपर की ओर बढ़ा है और एक अन्य चौंकाने वाला निष्कर्ष यह सामने आया है कि पिछले एक दशक के दौरान विकसित देशों में बढ़े महिला रोजगार ने ग्लोबल ग्रोथ में चीन से अधिक योगदान दिया है।

ग्लोबल मार्केट में महिलाओं की भूमिका निरंतर बढ़ती जा रही है-बतौर वर्कर, बतौर कंज्यूमर, एंटर प्रिन्युअर, मैनेजर और निवेशक के। घरेलू शॉपिंग तो हमेशा से ही महिलाओं ने अधिक की है। लेकिन अब उनके पास खर्च करने के लिए अपना पैसा भी ज्यादा है। अनुमान है कि खरीदारी के 80 प्रतिशत फैसले आजकल महिलाएं ही कर रही हैं। अध्ययनों के अनुसार हेल्थ केयर और घर के फर्नीचर और फूड तक खरीदने में महिलाओं की भूमिका ही महत्वपूर्ण है। सच बात तो यह है कि हिन्दुस्तान तेजी से विकास की नयी बुलंदियां छू रहा है, रीटेलिंग उद्योग महिलाओं पर ही टिका है। 1.25 लाख करोड़ रुपये सालाना कारोबार से भी ऊपर जा चुका है।

वर्ष 1950 में, वर्किंग एज की सिर्फ एक तिहाई अमेरिकी महिलाओं के पास पेड जॉब था। आज दो तिहाई के पास है और अमेरिका के कुल कार्यबल का महिलाएं आधा हिस्सा हैं। दूसरी ओर, 1950 से अब तक पुरुषों की रोजगार दर 12 प्रतिशत गिरकर 77 फीसद रह गयी है। तथ्य यह है कि तकरीबन सभी जगह अधिक महिलाओं को रोजगार दिया जा रहा है और जॉब में पुरुषों का प्रतिशत गिर रहा है। हालांकि इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता कि कुछ देशों में कार्यस्थल का महिलाकरण होने में अभी समय लगेगा। मसलन, इटली और जापान में जॉब्स में महिलाओं की हिस्सेदारी अब भी 40 प्रतिशत या उससे कम है।

विकासशील देशों में भी अब अधिक महिलाओं के पास पेड जॉब हैं। विकास कर रहे पूर्वी एशिया के देशों में श्रम बल में हर 100 पुरुषों के साथ अब 83 महिलाएं भी हैं। यह प्रतिशत ओईसीडी देशों के औसत से अधिक है। एशिया के एक्सपोर्ट उद्योग की सफलता में महिलाओं की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही है। बहुत से एक्सपोर्ट क्षेत्रों के रोजगारों में उनका प्रतिशत 60-80 है, खासकर टेक्सटाइल और क्लॉथिंग में।

विकसित देशों में महिला रोजगार में वृद्घि के कारण जॉब्स की किस्मों में भारी बदलाव आया है। निर्माण कार्य जो आमतौर से पुरुष किया करते थे उसमें गिरावट आयी है जबकि सर्विस जॉब्स का विस्तार हो रहा है। इससे मैनुअल लेबर की मांग कम हो गयी है और इस तरह जॉब के मामले में दोनों लिंगों को बराबरी के पायदान पर लाकर खड़ा कर दिया है।

आगे आने वाले वर्षों में, अधिक शिक्षित महिलाएं टॉप के अधिक जॉब लेंगी। फिलहाल ब्रिटेन में पुरुषों की तुलना में अधिक महिला डॉक्टर और वकील हैं। लेकिन सर्जन या लॉ कंपनियों में पार्टनर के तौर पर उनकी संख्या अब भी कम है। महिलाओं को पुरुषों की तुलना में औसतन पैसा भी कम मिलता है। लेकिन ऐसा नहीं है कि समान जॉब के लिए उन्हें पैसा कम मिलता है, बस वे करिअर की सीढ़ी पर ज्यादा ऊंचा चढ़ना नहीं चाहतीं या वे कम पैसे वाले रोजगार का चयन करती हैं, जैसे नर्सिंग और टीचिंग। लेकिन इस पैटर्न के बदलने की अधिक संभावनाएं हैं, यह भी अच्छी खबर है। अगर भारतीय रोजगार परिदृश्य पर नजर डालें तो चौंकाने वाला नजारा दिखता है। भारत ने कार्पोरेट परिदृश्य में जहां 2 दशक पहले एक भी टॉप बॉस महिला नहीं थी, वहीं आज बड़ी-बड़ी बहुराष्टीय कंपनियों से लेकर कामयाब देसी कंपनियों में भी महिलाएं टॉप बॉस बन रही हैं। भारत स्थित माइाोसॉफ्ट और पेप्सीको इंडिया तक की टॉप बॉस महिलाएं ही हैं।

विश्र्व के कार्पोरेट बोर्डों में सिर्फ 7 प्रतिशत महिला निदेशक हैं- 15 प्रतिशत अमेरिका में लेकिन एक प्रतिशत से कम जापान में- बावजूद इसके जिन अमेरिकी कंपनियों में वरिष्ठ प्रबंधकों के जॉब अधिक महिलाओं के पास हैं। उन्हें इक्विटी पर अधिक रिटर्न मिलता है। ऐसा संभवतः इसलिए है क्योंकि समस्याओं का समाधान करने में दोनों सेक्स की टीम सिंगल सेक्स की टीम से अधिक बेहतर होती हैं और बाहरी खतरों को भी जल्दी देख लेती हैं, साथ ही टीम और कम्युनिकेशन विकसित करने में महिलाएं अधिक बेहतर होती हैं।

शोधकर्ता इस नतीजे पर भी पहुंचे हैं कि महिलाएं पुरुषों से बेहतर निवेशक होती हैं। ब्रिटेन के वित्त साइट, “डिजिटल लुक’ के सर्वे में पाया गया कि महिलाएं निरंतर अधिक रिटर्न पाती हैं पुरुषों की तुलना में। अमेरिकी निवेशकों का सर्वे “मैरिल लिंच’ ने किया यह जानने के लिए कि महिलाएं बेहतर निवेशक क्यों हैं? महिलाएं रिस्क कम लेती हैं और पुरुष एक ही रिस्की आइडिये में ओवर कांफीडेंस के साथ निवेश कर देते हैं और वे ओवर टेडिंग भी करते हैं जिससे खराब निवेश रिटर्न आते हैं।

टोक्यो में गोल्डमैन शैश के मुख्य योजनाकार कैथी मत्सुई ने 115 जापानी कंपनियों की निशानदेही की है जो महिलाओं की बढ़ती खरीद शक्ति से और अधिक कामकाज करने के कारण बदलते जीवनों से लाभान्वित होंगी। इनमें शामिल हैं- वित्त सेवाएं, ऑनलाइन रीटेलिंग, ब्यूटी, कपड़े और पहले से तैयारशुदा फूड्स। इसके बावजूद आज भी महिलाएं दुनिया की सबसे कम इस्तेमाल किया जाने वाला संसाधन हैं। बहुत-सी महिलाओं को पेड वर्क में शामिल नहीं किया जाता, बहुत सी महिलाएं अपने कौशल का सही इस्तेमाल नहीं कर पातीं। जापान में सिर्फ 57 प्रतिशत महिलाएं काम करती हैं और अमेरिका में यह प्रतिशत 65 है। जहां तक इस पूरे परिदृश्य का संदेश हिन्दुस्तान के लिए है तो हमारे यहां तो अभी सही अर्थों में महिला कार्यबल का 30 प्रतिशत भी इस्तेमाल नहीं हो रहा। हां, कार्पोरेट बोर्डरूम में जरूर इससे ज्यादा महिलाएं पहुंच गई हैं। बहरहाल, वह प्रगति वास्तविक नहीं है। लेकिन जिस तरह से हिन्दुस्तान में तेजी से महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रही हैं विशेषकर सर्विस क्षेत्र में, वह इस बात की उम्मीद बंधाता है कि बहुत ही जल्द भारत में भी महिलाएं धूम मचाती दिखेंगी।

 

– वीना सुखीजा

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