नार मोहे शंकर रो वरदान भजन

नार मोहे शंकर रो वरदान नार मोहे भोला रो वरदान
क्या करसी भगवान, क्या करसी भगवान नार मोहे
क्या करसी भगवान॥ टेर ॥
एक निद शिवजी मेरे घर आए।
मेरे पिता ने निवत् जीमाए।
जीम चूट बडे प्रसन्न भए शिव, लंका कर दी दान॥ 1 ॥
लंका जैसे कोठ हमारे।
सात समुन्दर लगे किनारे॥
मेघनाथ से पुत्र हमारे, कुंभ केरन बलवान॥ 2 ॥
अहिरावण भाई बसे पता ले।
जिनके जडे वज्र के ताले॥
राम लक्ष्मण दोय पकड मँगाऊ, संग लावे हनुमान॥ 3 ॥
राम राम सियाराम रटो रे।
हरी चरणों में ध्यान धरो रे॥
तुलसी दास यूँ कहत मन्दोदर भाग्य बडे बलवान॥ 4 ॥

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