नो कॅरियर, विदाउट कंप्यूटर!

1998 में भारत सरकार ने कंप्यूटर का महत्व समझा और देश के सभी सांसदों के लिए कंप्यूटर सीखाने की संसद से एक अपील की गई। हालांकि सांसदों के लिए यह बाध्यता नहीं थी कि वह कंप्यूटर सीखें, तभी संसद सदस्य रह पाएंगे। लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि 10 साल पहले सरकार और संसद के इस फरमान से कंप्यूटर का कॅरियर में महत्व रेखांकित हुआ था। भारत सरकार ने तब अपने सभी मंत्रियों और बाद में सभी सांसदों को एक-एक लैपटॉप भी दिया था। बाद में विधायकों को भी लैपटॉप देने की यह रस्म पूरे देश में चली।

आज 10 साल बाद शायद हम कंप्यूटर के बिना किसी भी कॅरियर की कल्पना ही नहीं कर सकते। कंप्यूटर और कॅरियर एक-दूसरे के अभिन्न अंग बन गए हैं। 10 साल पहले जहां सरकार ने सभी सांसदों को लैपटॉप उपलब्ध कराया था और सभी के लिए कंप्यूटर टेनिंग की सुविधा का भी बंदोबस्त किया था। यही नियम बाद में सभी तरह के दफ्तरों में भी लागू हुआ। चाहे दफ्तर सरकारी रहे हों, अर्धसरकारी या प्राइवेट। क्योंकि कंप्यूटर के बिना शायद जीवन की कल्पना ही अब नहीं की जा सकती। हर किसी के जीवन और कॅरियर में कंप्यूटर की मौजूदगी अनिवार्य हो चुकी है। यहां तक कि जो न सिर्फ पहले से ही नौकरीपेशे में हैं बल्कि उनके रिटायर होने में कुछ ही दिन बाकी हैं। फिर भी उन्हें कंप्यूटर सीखना अनिवार्य हो गया है, क्योंकि बिना कंप्यूटर के वह एक दिन तो क्या, एक घंटे भी अब दफ्तरों में काम नहीं कर सकते।

हालांकि यह भी सच है कि अभी हिन्दुस्तान में हर कुर्सी पर बैठने वाले कर्मचारी की मेज पर कंप्यूटर नहीं है। लेकिन वह दिन दूर नहीं जब हर कुर्सी के सामने रखी मेज पर अनिवार्य रूप से एक कंप्यूटर भी होगा। इसकी वजह यह है कि आने वाले 5 से 10 सालों में शहरों की ही नहीं छोटे शहरों, कस्बों और यहां तक कि गांवों के भी तमाम कामकाज कंप्यूटर में ही होंगे। बही-खाता क्या होता है, यह सन् 2025 के बाद पैदा होने वाली पीढ़ियां जानेंगी ही नहीं। जैसे आजकल की पीढ़ी यह नहीं जानती कि हुंडी क्या चीज होती थी और अगर यह आधुनिक चेक का प्रारंभिक रूप था तो इसकी व्यवस्था क्या थी?

देश के महानगरों और मझोले शहरों में अब शायद ही कोई ऐसा दफ्तर बचा हो, जहां हर काम हाथ से होता हो। कंप्यूटर के कई फायदे हैं। यह काम की उत्पादकता बढ़ाता है, कंप्यूटर के जरिए आप बिना कंप्यूटर के मुकाबले कई गुना ज्यादा काम कर सकते हैं। कंप्यूटर में लिखी गई किसी इबारत को बार-बार संपादित किया जा सकता है यानी इसकी काट-छॉंट की जा सकती है। इसमें कुछ जोड़ा जा सकता है, कुछ घटाया जा सकता है और इसे जितना भी बेहतर हो सके बनाया जा सकता है, वह भी बिना किसी तरह की काट-पीट या गंदगी के।

कंप्यूटर तेजी से काम करता है। इससे काम करने में गलतियां कम होती हैं। होती हैं तो उन्हें ठीक करने की सुविधा होती है। इस सबके अलावा कंप्यूटर ने पूरी दुनिया को आपस में जोड़ देने का भी काम किया है। इस सबके चलते कंप्यूटर लगभग हर तरह के दफ्तरों में एक अनिवार्य एवं अपरिहार्य तकनीकी उपकरण बन गया है। कुछ साल पहले तक कुछ लोगों का मानना था कि कंप्यूटर सबके लिए नहीं है। यह कुछ खास पेशेवरों के लिए ही है। यहां तक कि 90 के दशक की शुरूआत तक देश की मजदूर यूनियनों ने कंप्यूटर को बेरोजगारी और भुखमरी की आशंकाओं से जोड़ा था। बड़े-बड़े आंदोलन हुए, नारेबाजियां हुईं और कहा गया कि अगर जल्द ही कंप्यूटर के मोह से बाहर न निकले तो एक दिन ऐसा आएगा कि लोग बेरोजगार हो जाएंगे और उसकी वजह कंप्यूटर होगा। लेकिन अब ऐसा नहीं है। अब कंप्यूटर के विरूद्घ कहीं पर भी आंदोलन नहीं होते। यहां तक कि मजदूर यूनियनों के दफ्तरों में भी सारे काम कंप्यूटरों के जरिए ही होते हैं।

कंप्यूटर ने अपने इस्तेमाल से यह भी साबित किया है कि वह न तो बेरोजगारी का जरिया बन सकता है और न ही भुखमरी का। उलटे कंप्यूटर के आने के बाद अर्थव्यवस्था में तेजी से इजाफा हुआ है। कंप्यूटर ने तमाम किस्म की वृद्घि व विकास में अहम भूमिका निभाई है। कंप्यूटर की वजह से ही आज भारतीय रेलवे अरबों के मुनाफे में है। ये कंप्यूटर ही है, जिसकी बदौलत आज 6 अरब डॉलर से भी ज्यादा का ई-कॉमर्स हो रहा है। यह कंप्यूटर ही है, जो आज ई-गवर्नेंस के जरिए विभिन्न सरकारों के न सिर्फ अरबों रूपये बचा रहा है बल्कि उनके कामकाज के ढंग में 50 से 200 फीसदी तक की तेजी ले आया है।

कंप्यूटर से हर काम आसान हो गया है और मजे की बात यह है कि दुनिया का कोई भी ऐसा काम नहीं है, जिसको उन्नत बनाने में आज कंप्यूटर का महत्वपूर्ण रोल न हो। जो लोग सोचते थे कि कंप्यूटर सिर्फ कुछ सेवा क्षेत्रों में ही सहायक की भूमिका निभा सकता है, वो लोग तो यह देखकर हैरान हो सकते हैं कि आज कंप्यूटर बढ़ई के लिए भी उतना ही फायदेमंद है जितना कि मछुआरे के लिए। चाहे खेत में काम कर रहा किसान हो, चाहे फैक्टरी में मेहनत कर रहा मजदूर हो, चाहे सरहद में लड़ रहा जवान हो या किसी बहुराष्टीय कंपनी में बैठा मैनेजर। कंप्यूटर सभी के लिए फायदेमंद है और सभी के लिए भरपूर फायदेमंद है। कोई यह नहीं कह सकता कि मेरे लिए कंप्यूटर का कम फायदा और दूसरे के लिए ज्यादा फायदा है। दरअसल, कंप्यूटर लोगों के कामकाज ही नहीं, बल्कि जीवन जीने की समूची जीवन-शैली में ही समाहित हो गया है, यही वजह है कि आज कंप्यूटर के बिना एक पल के लिए भी काम नहीं चल सकता।

कंप्यूटर न हो तो खदानों में खुदाई रुक जाए, कंप्यूटर न हो तो हवाई अड्डों में हवाई जहाजों की उड़ाने रुक जाएं, सेनाएं दुश्मनों की सेना पर हमला न कर पाएं, छात्र परीक्षा हॉल में बैठे प्रश्न-पत्र का इंतजार ही करते रहें और अस्पतालों में मरीज बिलबिलाते ही रहें। कंप्यूटर सुबह जगने से लेकर रात सोने तक की कोई भी ऐसी गतिविधि नहीं है, जिसका अनिवार्य हिस्सा न बन गया हो। अगर एक घंटे के लिए पूरी दुनिया के कंप्यूटर रुक जाएं, तो दुनिया में हाहाकार मच जाए। पूरी दुनिया ठहर-सी जाए। रेलगाड़ियां, हवाई जहाज, पानी के जहाज जहां हैं, वहीं ठहर जाएं। सिर्फ यही नहीं, बड़ी-बड़ी मशीनें, बिजली उत्पादक, टर्बाइनें, टेलीविजन के प्रसारण, सब कुछ जहां है, वहीं का वहीं ठहर सकता है अगर कुछ देर के लिए पूरी दुनिया के कंप्यूटर ठहर जाएं।

कारण है कि आज कंप्यूटर कॅरियर के लिए अनिवार्य हो चुका है और यह किसी एक या कुछ खास पेशों के लिए नहीं बल्कि सभी तरह के पेशों के लिए जरूरी हो चुका है। इसलिए अगर आपने कोई कंप्यूटर टेनिंग अभी तक नहीं ली तो जितनी जल्दी हो इसे शुरू करें। नहीं तो आप जीवन में बहुत पिछड़ जाएंगे।

– शैलेंद्र सिंहयही

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