पिछम धरा में सिंवरु रामदेव, बरसो आलमराजा भजन

पिछम धरा में सिंवरु रामदेव, बरसो आलमराजा।
बराबरी हींग लाज ने सिंवरु बाजे, अनहद बाजा॥
हो महाराज बेगो आजा, म्हारें बाँध सेवरो आजा।
म्हारे भली भाँति सुं आजा, हाथीयाँ रे होदे आजा॥
घुडल्यारी घूमर आजा, म्हारा फूल बनीरा बनडा।
म्हारा राय बनीरा लाडा, परनी जेन बेगो आजा॥
म्हारा पीर पिछम राजा हो महाराज बेगो आजा॥ टेर ॥
कलयुग देख डरो मति कँवर, दोय पग दिजो आगा।
कलयुग में कालिग्ड़ो चेत्यो, बेग चढ़ो महाराजा॥ 1 ॥
कसूमल पाग केसरिया जामों, बिन्द बन्या महाराजा।
जोड़ तोड़ राजा ने लाइजो, गढ़ा गढ़ा रा राजा॥ 2 ॥
लीलो घोड़ो थारे उबो हिंजरे, बेग चढ़ो महाराजा।
चाँद सूरज चीरागाँ लाईजो, इन्द्र सरीसा राजा॥ 3 ॥
लाडू मिठाई थारे चढ़े चूरमों, गरुवा सन्त जीमेला।
हीरा मोतीयाँ सुं थारे हुवेला, आरती, मोतीयाँरा चँवर ढूलेला॥ 4 ॥
चितौड़ चँवरी द्लिील डेरा, गहरा थम्ब रूपेला।
ब्रह्मा, विष्णु, चँवरियाँ मांड़ी, परणे आलम राजा॥ 5 ॥
घर रखियाँ रे कन्या कँवारी, ज्यो घर मोड बँधेला।
वीर भान् सोलंकी बोले, भाग बनी रा जांगा॥ 6 ॥

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