पुत्र पर संकट की स्थिति में कुत्ते की सेवा लाभप्रद

हमारे प्रिय पाठकों का हार्दिक धन्यवाद, जो फोन या अन्य माध्यम से हमें अपनी राय से अवगत कराते रहते हैं। आपके सुझावों के अनुसार, हम अपनी पूर्व में जारी नक्षत्र-विश्लेषण की श्रृंखला को भी जारी रखेंगे तथा बीच में बारी-बारी से अन्य ज्योतिषीय तथा वास्तु संबंधी जानकारी भी देते रहेंगे।

पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र : कुल 27 नक्षत्रों की श्रृंखला के ाम में 25वें स्थान पर आने वाला यह नक्षत्र, राशि चा की कुल डिग्री के 320.00 से लेकर 333.20 डिग्री तथा कुम्भ राशि के 20.00 से लेकर मीन राशि के 03:20 डिग्री के मध्य समाता है। इसे अंग्रेजी में “अल्फा पेगारसी’, अरबी भाषा में “अल-फरग-अल-मुकदिय’ तथा चीनी भाषा में “चे’ के नाम से जाना जाता है। दिसम्बर माह के मध्य में रात्रि नौ बजे के आस-पास मध्याकाश में मीन राशि को ध्यान से देखने पर पहले भाद्रपद नक्षत्र के चार तारों का चौरस क्लिप दिखाई देता है। इसमें प्रथम दो तारों को पूर्वाभाद्रपद कहा जाता है। आकाश में इसका आकार चौरस के एक तरफ की लकीर जैसा दिखता है। “पूर्वाभाद्रपद’ नक्षत्र का अधिष्ठाता देवता “अजैकपाद’ (शिव या रुद्र का एक रूप) माना गया है, जिसका एक पॉंव बकरी का होता है। इसका वर्णन पुराणों में भी मिलता है। यह स्वभाव से क्रूर नक्षत्र माना गया है, जिसकी विशोंतरी दशा-महादशा का स्वामी ग्रह गुरु होता है। अर्थात् इस नक्षत्र में उत्पन्न जातक की प्रारम्भिक ज्योतिषीय महादशा “गुरु’ ग्रह की होगी। कूर्मचा के अनुसार इसे भी उत्तर दिशा का निर्देशक माना गया है।

शारीरिक गठन : जातक के शरीर में एक विलक्षणता यह पायी जाती है कि इसके पॉंव के नीचे का टखना एवं जोड़ उभरा हुआ होता है। कद एवं डील-डौल, दोनों मध्यम आकार के तथा चौड़े गाल एवं लाल होंठ होते हैं।

स्वभाव एवं सामान्य घटना : इस नक्षत्र में उत्पन्न जातक कुछ शान्त स्वभाव का होता है। मगर कभी-कभी प्रचण्ड ाोध आ जाता है, जिस कारण कई बार लोगों में इसे मूर्ख स्वभाव वाला मान लिया जाता है। अति सिद्घान्ती व्यक्ति होने के कारण उसे मानसिक उत्पीड़न का शिकार होना पड़ता है, क्योंकि वह छोटी-छोटी बातों एवं समस्याओं को मन में बिठा लेता है। वह अच्छा भोजन करता है तथा अति भक्षक होता है, लेकिन पहनावे के मामले में कोई विशेष पसन्द नहीं होती। ़जरूरतमंदों को सहायता देने में तत्पर होता है, लेकिन उनसे बदले में टकराव ही मिलता है। आर्थिक रूप से कम़जोर होने के बावजूद दूसरों से सम्मान एवं विश्वास प्राप्त कर लेते हैं। धार्मिक स्वभाव के कारण वेद-शास्त्रों के अनुसार धार्मिक अनुष्ठान भी सम्पन्न करवाते हैं तथा धन-संचय करने की बजाय इज्जत और मान अर्जित करने पर ज्यादा जोर देते हैं। अपने विचारों को स्वतंत्र एवं निष्पक्ष ढंग से प्रस्तुत करते हैं।

 

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