पूजा-पाठ वास्तु-शांति का विकल्प नहीं

vastu-poojaप्रश्न : यह नक्शा मेरे गॉंव के मकान का है। चार वर्ष पहले हमने यह प्लाट खरीद कर इस मकान का निर्माण करवाया था। एक पंडित से विधिवत पूजा-पाठ तथा मकान में एक वास्तु शांति यंत्र स्थापित करके गृह प्रवेश किया था। इस मकान में रहना शुरू करने के करीब दो वर्ष के बाद मेरे पिताजी अचानक बीमार पड़ गये और उनकी अकाल मृत्यु हो गयी। मेरे भाई के व्यापार में नुकसान, गृह कलह, भाई-भाभी के आपसी रिश्तों में दरार इत्यादि समस्याएँ आईं। इन समस्याओं के निवारण के लिये हमें इस मकान में कौनसा यंत्र स्थापित करवाना चाहिए। कृपया हमारी समस्याओं के कारण और निवारण बताएँ।

उत्तर : इस मकान के खुले स्थान के पूर्व-आग्नेय का हिस्सा बढ़ जाने के कारण, खुले स्थान की पूर्व-ईशान दिशा कट गयी है। ईशान कट जाने के वास्तु दोष के दुष्परिणाम अन्य कई समस्याएँ पैदा करने के साथ गृह मालिक एवं प्रथम पुत्र के जीवन को प्रभावित तथा वंश-वृद्घि में रुकावट पैदा करते हैं। इस घातक वास्तु दोष के साथ खुले स्थान के नैऋत में सेप्टिक टैंक होने के कारण, गृह मालिक का जीवन मृत्यु तुल्य ही व्यतीत होता है।

हालॉंकि जीवन और मृत्यु प्रकृति का एक नियम है, और इसके पीछे किसी का भी वश नहीं चलता है। लेकिन इसके साथ इस सच्चाई से भी इन्कार नहीं किया जा सकता है कि इस मकान के उपरोक्त दोनों घातक वास्तु दोषों के दुष्परिणाम ही आपके पिताजी की अकाल मृत्यु होने का कारण बनने में अहम भूमिका निभा रहे थे।

आग्नेय में भूमिगत पानी का टैंक, धन-हानि व गृह कलह कारक होता है तथा यह वास्तु दोष द्वितीय संतान के जीवन को ज्यादा प्रभावित करता है, जिसके कारण आपके भाई-भाभी के आपसी रिश्तों में दरार पड़ने की स्थिति पैदा हो गयी है। मकान के उत्तर में शौचालय होने के कारण धन-हानि होने के साथ ही घर का वातावरण कलहकारी होता है। आग्नेय के कमरे में सोने वाले पुरुष वर्ग के स्वास्थ्य व समृद्घि में विपरीत परिणाम प्राप्त होते हैं तथा पति-पत्नी के बीच आपस में मतभेद पैदा होते हैं।

इतनी समस्याओं के भंवर में जीवन व्यतीत करने के उपरांत भी आप मकान में यंत्र स्थापित करके, समस्याओं से निवारण प्राप्त करने के सपने देखना छोड़ना नहीं चाहते। आप इस मकान में पहले भी एक यंत्र स्थापित कर चुके हैं, जो निषिय एवं प्रभावहीन साबित हो चुका है।

पूजा-पाठ, यंत्र इत्यादि आपकी धार्मिक भावना एवं आस्था से जुड़े हुए हैं। अतः बेहतर यही होगा कि आप यंत्रों के मायाजाल से बाहर निकलें, क्योंकि मकान में यंत्र स्थापित करने से ना तो मकान के वास्तु दोषों का शमन होता है और ना ही मकान के वास्तु बल को बढ़ाना संभव हो सकता है। आपकी समस्याओं से समाधान प्राप्त करने के लिये निम्न फेरबदल अपेक्षित हैं :-

  • खुले स्थान के पूर्व में, नक्शे में निर्देशानुसार नयी तिरछी चारदीवारी बनाएँ, इससे खुले स्थान के बढ़े हुए पूर्व-आग्नेय का हिस्सा इस मकान से अलग हो जाएगा और पूर्व-ईशान बढ़ जाएगा, जो कि समृद्घि दायक होगा। पूर्व-आग्नेय के अलग किये गये हिस्से को आप चाहें तो पूर्व में स्थित पड़ोसी को बेच दें, अन्यथा खुला छोड़ दें।
  • आग्नेय में स्थित भूमिगत पानी के टैंक को मिट्टी से भरकर बंद करके, ईशान में कर्ण रेखा को छोड़कर पूर्व-ईशान तथा उत्तर-ईशान में एक-एक भूमिगत पानी के टैंक बनाएँ।
  • नैऋत में स्थित शौचालय को तोड़कर, सेप्टिक टैंक को मिट्टी से भरकर बंद करके, उत्तर-वायव्य में नया सेप्टिक टैंक इस तरह से बनाएँ कि यह नया सेप्टिक टैंक वायव्य के कमरे के उत्तर-वायव्य तक के हिस्से में ही आये।
  • मकान के उत्तर में स्थित स्नानघर एवं शौचालय को तोड़कर नैऋत के कमरे को दो हिस्सों में विभाजित करके फर्श की ऊँचाई बढ़ाकर, स्नानघर एवं शौचालय बनाएँ।
  • आग्नेय व वायव्य के कमरों के पूर्व-आग्नेय तथा बैठक के पश्र्चिम-नैऋत में स्थित दरवाजों को, आग्नेय के कमरे के दक्षिण, वायव्य के कमरे के पूर्व-ईशान तथा बैठक के पश्र्चिम-वायव्य में इस तरह से स्थानान्तरित करें कि आमने-सामने दो से ज्यादा दरवाजे नहीं आएँ।
  • आग्नेय के कमरे को रसोई घर, वायव्य के कमरे को शयन कक्ष तथा पूर्व या पश्र्चिम के कमरे को बच्चों के शयन कक्ष के लिये उपयोग करें।

उपरोक्त फेरबदल करवाने के बाद ना सिर्फ आपकी आर्थिक व गृह कलह की समस्याओं का समाधान होगा, बल्कि आपके भाई-भाभी के आपसी रिश्ते मधुर बने रहेंगे।

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