बहादुर प्रिया ने बचाई जान

प्रिया को किताब चाहिए थी। उसने हनुमान मंदिर के पास अपनी साइकिल खड़ी की और सामने किताब वाले की दुकान पर गई। उसने किताबें खरीद लीं। फिर साइकिल लेने वापस हनुमान मंदिर के पास गई। उसकी सहेली मिताली भी उसके साथ थी। वह मिताली से बोली, “”चलो! जल्दी निकल लेते हैं। यहॉं थोड़ी देर बाद भीड़ बढ़ जाएगी। तब साइकिल निकालना मुश्किल हो जाएगा।”

“”हॉं चलो, जल्दी चलते हैं”, मिताली बोली। तभी उसका ध्यान पास वाली साइकिल पर गया। “”अरे, इस साइकिल में से यह टिकटिक की आवा़ज कैसी आ रही है।” प्रिया ने गौर से सुना। एक पुरानी साइकिल के कॅरियर से आवा़ज आ रही थी। उसने ध्यान से देखा। साइकिल के पीछे कोई बैग बंधा था। उसे शंका हुई, “”यह घड़ी की आवा़ज तो नहीं है?”

“”हॉं, आवा़ज तो घड़ी जैसी ही है”, मिताली बोली तो प्रिया ने उसे दूर खींचते हुए कहा, “”चल, एसटीडी पर चलते हैं”, कहते हुए दोनों पास की एसटीडी की तरफ भागीं। वहॉं से प्रिया ने 100 नंबर डायल कर कहा, “”अंकल, हम हनुमान मंदिर के पास से बोल रही हैं” कहते हुए प्रिया ने साइकिल वाली बात पुलिस इंस्पेक्टर को बता दी।

उधर से तुरंत निर्देश मिला, “”गुड़िया, तुम ऐसा करो कि किसी बड़े व्यक्ति को कहकर साइकिल के पास से लोगों को हटवा दो।”

प्रिया ने ऐसा ही किया। एसटीडी वाले से बात की। वह तुरंत तैयार हो गया। उसने प्रिया की पूरी बात सुन ली थी। वह तुरंत साइकिल के पास गया। वहॉं से लोगों को दूर रहने का निर्देश दिया।

तब तक आसपास के दुकानदार भी एकत्र हो गए थे। सब लोग साइकिल से 200 मीटर के फासले पर खड़े हो गए। हनुमान मंदिर में होने वाली आरती को स्थगित कर दिया गया।

10 मिनट में पुलिस की जीप आकर रुकी। उसमें से बम स्क्वाड के व्यक्ति उतर कर साइकिल के पास गए। उन्होंने साइकिल के कॅरियर पर बंधी सामग्री उतार कर बम को निषिय कर दिया। तब मालूम हुआ कि यह साइकिल बम बहुत शक्तिशाली था। यदि यह फट जाता तो सैकड़ों व्यक्ति मारे जाते।

पुलिस इंस्पेक्टर ने प्रिया-मिताली की इस सूझबूझ की प्रशंसा की, “”शाबाश गुड़िया, तुमने ठीक समय पर सूचना देकर हजारों लोगों की जान बचा ली, नहीं तो आज कई बेकसूर लोग मारे जाते।”

“”और हॉं बिटिया, कई लोगों की संपत्ति नष्ट हो जाती”, एसटीडी वाले सज्जन ने प्रिया को 500 का नोट इनाम में देने चाहे तो प्रिया बोली, “”नहीं अंकल, हमें इनाम नहीं, आशीर्वाद दीजिए। ताकि हम एक निडर और बहादुर पायलट बन सकें।”

“”क्यों नहीं, एक दिन तुम ़जरूर अपने मम्मी-पापा के साथ-साथ देश का नाम रौशन करोगी”, एक पत्रकार ने प्रिया – मिताली का फोटो लेते हुए कहा, “”कल तुम हमारे चैनल पर अपनी बहादुरी का कारनामा देखना, तुमने बहुत बहादुरी का काम किया है।”

पत्रकार की बात सुनकर प्रिया – मिताली बड़ी खुश हुईं। जब यह बात उनके माता-पिता को मालूम हुई तो वे खुश होते हुए बोले, “”वाकई! तुमने हमारा नाम ऊँचा कर दिया।”

“”आखिर हम बेटियॉं किसकी हैं?” प्रिया ने कहा तो सब हंस-हंस कर लोटपोट हो गए और उसके माता-पिता समवेत स्वर में बोल उठे, “”हमारी!”

– ओमप्रकाश क्षत्रिय “प्रकाश’

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