बाबा रामदेव जी ओ ताने खमा घणी भजन

बाबा रामदेव जी ओ ताने खमा घणी
मरुधरा हो देव थारी ध्वजा फरूखे सारा देश में
साच्चा मन सु ध्यावे जिनरो जन्म सफल होवे
मालका ते हो कलयुग रा भगवान
थाने खमा घणी
निर सागर में अजमलजी ने
दियो हरी यो वरदान जी
भादवा री दुज चादनी
आऊला राखन थारो मानजी
पानी रो सब दूध बगीयो
कुम कुम रा पगलिया माडीया
वापसी द्वारका रा नाथ झुले
देखोना पालनीया रे मायजी
ये हो द्वारका रा नाथ
थाने खमा घणी टेर
दूध पिलाती मेनादे रे
मन मे या शंका आई
स्वामी कहे अवतार लियो है
क्या है इस में सच्चाई
दूध उफनतो दियो उतार
बात जान के रे मन कि
मनादे री शंका मिठ गई
दे के लिा भगवान कि
थे हो मनादे रा लाल
थाने खम्मा घणी टेर
मनादे रे हुक्मसु दुरजी
घोड़ो एक बना दियो
रामदेवजी रमत रमत में
उन घोड़े ने उड़ा दियो
अजमलजी ने जादु समजा
दरजी जेल में डाल दियो
सच्चाई जब खबर पड़ी तो
उन दरजी ने साफ कियो
थे हो लिले रा असवार
थाने खमा घणी
दोहा
पाँच पिर परदेशी आया परखन रामापिर
बाबा बोले आवो पिरा जिमो मिठी खिर
बोलिया मे तो बर्तन मारा, भुलीया मक्मामा देना
वे हि कठोरा मरा आवे, जद थारे घर जिमा
पाँच पिर परदेशी आया
रामदेव जी री परख करें
राम देव जिमन रो बोले
पिरा भोजन नहीं करे
में मारा बर्तन मक्का भुलिया
थारे बर्तन में नही खाया
रामदेव बोलिया पचे
लो थानो बर्तन मगलाव
ये हो पिरा पिर
थाने खमा घणी टेर
दोहा
अमर कौठ सोडा थनी, कन्या जन्मी एक
आजमल सुक्ष अवतार सु लिखीयो विधाता लेख
दलजी के दो पुत्र भये कन्या एक सुजान
बाहामण बैदिक देख के दियो नेतल दे नाम
दलजी सोडा रे घर में जन्मी
बाई नेतल दे एक पांगली
सपने में हि रामदेव जी
उन ने चलाई पकड़ आगली
बोली मे तो परनु रामदेव
जद मारो सपनों वेल सायजी
बिन्द राजा बनीया रामदेव
राखो ने तल देरी लाज जी
थे हो नेतल रा भरतार
थाने खमा घणी
रामा सरोवर खड़ा रामदेव
लोगा ने यु समझाया
मारी समाधी का ईन खोद
सगल ने यु बतलाया
रूणेचा रा नर और नारी
रो रो हेला मारे जी
छोटा-छोटा टावरीया भी
रो रो पिर र पुकारे जी
थो हो रूणीचा रा श्याम थाने खम्मा घणी

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