माटी को खीलौनो है, मन में जँचायले भजन

माटी को खीलौनो है, मन में जँचायले।
कब उड़ जावे हँसा, हरि गुण गाय ले॥ टेर ॥
थने तो जरूरी प्यारा जानो ही पड़सी।
करनी करी तो पछतानों ही पड़सी।
घड़ी दो घड़ी प्रभु की, याद में बिताय ले॥ 1 ॥
काया है झूठी जग में, माया है झूठी।
दिन चार माँ ही होवे, दुनियाँ से छुट्टी।
राम नाम गँगा माँही डूबकी, लगाये ले॥ 2 ॥
दिन चढ़ आयो बन्दा चेत ले दिवाना।
बितोड़या दिन थारा, पाछा नहीं आवन।
कर ले जत्न शिव, मन समझाय ले॥ 3 ॥

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