मुक्तक

बिन मां के

बच्चों को

बिगड़ते देख

आँख

नम हो गई थी

गृहस्थी की

गाड़ी

खिंच नहीं रही थी

हवा कम हो गई थी

 

– शरद जायसवाल

कटनी, मध्यप्रदेश

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