मुलाकातों और मुख्यालयों की शहर

विषय चाहे जो हो, सन्दर्भ चाहे जो हो, यहां तक कि विचारधारा चाहे जो हो। मगर हर पांचवी अंतर्राष्टीय बैठक की जगह जेनेवा ही होती है। जी हां, जेनेवा को चाहे तो हम वैश्र्विक बैठकों, डिप्लोमेटिक मेल-मुलाकातों का शहर भी कह सकते हैं। इसके साथ-साथ जेनेवा विश्र्व की तमाम अंतर्राष्टीय संस्थाओं, संगठनों के मुख्यालयों का भी शहर है। वर्ल्ड टेड ऑर्गेनाइजेशन, वर्ल्ड मेटोलॉजिकल ऑर्गेनाइजेशन, यूनाईटेड नेशंस चिल्डेन्स फंड, इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइजेशन, वर्ल्ड काउंसिल ऑफ चर्चेज जैसे विश्र्वविख्यात संगठनों एवं संस्थाओं का मुख्यालय जेनेवा ही है।

शीतयुद्घ के दिनों में भी दुनिया के दोनों ही वैचारिक खेमों से तटस्थ रहने के कारण जेनेवा ने तमाम ऐतिहासिक अंतर्राष्टीय बैठकों की जगह होने का गौरव हासिल किया है। यह जेनेवा ही था, जो 1979 में विश्र्व निरस्त्रीकरण का स्थाई मुख्यालय बन गया। जिसके 60 से ज्यादा सदस्य हैं। इसी संगठन ने बाद में सीटीबीटी और आणविक सामग्री व तकनीकी के प्रसार को रोकने का रास्ता सुझाया। अमेरिका के राष्टपति रोनाल्ड रीगन और सोवियत संघ के राष्टपति मिखाइल गोर्बाच्यौव के बीच 1985 में जो ऐतिहासिक प्रारंभिक मुलाकात हुई, जो अन्ततः शीतयुद्घ के खात्मे की प्रेरणा बनी, वह यहीं हुई थी। हालांकि तब इस पहली मुलाकात में दोनों नेताओं के बीच कोई ठोस वायदे नहीं किए गये थे। लेकिन यह पहला मौका था जब दुनिया की दो महाशक्तियों के शीर्ष नेताओं ने महाविनाश के हथियारों (न्यूक्लियर वेपंस) में कमी करने के संबंध में विचार-विमर्श किया था। जेनेवा में ही विश्र्वविख्यात सर्न लेबोरेटी स्थित है, जहां वर्ल्ड वाइड वेब की शुरूआत हुई थी। इन दिनों ब्रह्मांड के रहस्यों को जानने के लिए अब तक का जो सबसे बड़ा वैज्ञानिक प्रयोग हो रहा है, वह भी जेनेवा के निकट ही हो रहा है।

ये तथ्य इस बात के गवाह हैं कि जेनेवा यूरोप का ही नहीं पूरी दुनिया का सम्भवतः सर्वमान्य अन्तर्राष्टीय शहर है। जेनेवा में सैकड़ों विश्र्वविख्यात बहुराष्टीय कंपनियों के मुख्यालय भी हैं। यही कारण है कि पूरे साल इस शहर में हमेशा तमाम बैठकें, सेमिनार चलते ही रहते हैं। एक चीज और जेनेवा की पहचान है जिसका अगर शुरूआत में ही जिा न किया जाय तो उसके महत्व के साथ नाइंसाफी करना होगा। स्विट्जरलैंड अपनी मजबूत और विश्र्वसनीय (कुछ मामलों में रहस्यमयी) बैंकिंग व्यवस्था के लिए भी पूरी दुनिया में मशहूर है। माना जाता है कि धरती में चाहे जितनी उथल-पुथल हो जाये, लेकिन स्विस बैंकों में जमा पैसा सुरक्षित रहेगा। जेनेवा में विश्र्वविख्यात स्विस बैंकों में से ज्यादातर के मुख्यालय हैं।

स्विट्जरलैंड के पश्र्चिमी कोने में बिल्कुल फ्रांस से सटा हुआ जेनेवा, जेनेवा कैंटोन की राजधानी और यूरोप का सर्वाधिक कॉस्मोपॉलिटिन शहर है। जेनेवा लोकतांत्रिक सरकारों के लिए एक मॉडल, एक प्रतीक भी है कि लोकतांत्रिक सरकारों को मानवाधिकारों, मानवीय गरीमा को बजाय भौगोलिक कारकों और विकास की अंधी दौड़ के किस तरह प्राथमिकता देनी चाहिए।

गौरतलब है कि जेनेवा का यह चरित्र पिछली 16वीं शताब्दी से मौजूद है। जब यह सुधारों की जननी “प्रोटेस्टैंट रोम’ में बदल गया। जेनेवा कैंटोन का कुल क्षेत्रफल 109 वर्गमील है। मूल जेनेवा शहर 7 वर्गमील में बसा हुआ है। जेनेवा का बुनियादी चरित्र राजनीतिक और वैचारिक तटस्थता है। इसकी जड़ इसके इतिहास में है। सन् 1815 तक जेनेवा अपने इर्द-गिर्द फ्रांस में मचे तमाम राजनीतिक और सांस्कृतिक उथल-पुथल से अछूता रहा। चारों तरफ रोमन कैथोलिक प्रभुत्व का डंका बजता रहा और जेनेवा इसके बीच अपनी ताकतवर बौद्घिक मेधा तथा शेष यूरोप के साथ आर्थिक रिश्तों की बदौलत प्रोटेस्टैंट रोम के रूप में मौजूद रहा। बाद में यही उसकी ताकत और खूबी बन गई।

580 किलोमीटर लम्बी और मध्य यूरोप की सबसे बड़ी झील के दक्षिण-पश्र्चिमी किनारे पर बसा जेनेवा दुनिया के सबसे समृद्घ शहरों में से एक है। इसकी कुल आबादी 2.5 लाख के आस-पास है। यह तमाम संस्कृतियों का संगम है। सिर्फ संस्कृतियों का ही नहीं व्यापार और वित्त का भी दुनिया का बहुत बड़ा संगम है। जेनेवा से गुजर कर बहने वाली रोम नदी के लिए यह शहर एक जंक्शन की माफिक है। जेनेवा का भूगोल भी खास है। यह समुद्र तल से 1230 फीट की ऊंचाई पर बसा है और इसके चारों तरफ खूबसूरत एल्प्स पर्वत श्रृंखलाएं मौजूद हैं। जहां पर जेनेवा बसा है, एल्प्स और जूरा पर्वत के मध्य वहीं स्विस गलियारे का भी निर्माण होता है। यहीं से वह अल्पाइन पैसेज भी जाता है, जो इटली को जोड़ता है और सायोन-रोन धुरी निर्मित करता है, जिससे मेडिटेरियन के लिए रास्ता बनता है।

जेनेवा का मौसम पूरे साल सुहाना रहता है। जनवरी के महीने में यहां न्यूनतम तापमान 10 सेंटीग्रेड तक गिर जाता है। जुलाई के महीने में अधिकतम तापमान 180 सेंटीग्रेड रहता है। जेनेवा अपने कारोबारी और वित्तीय स्रोतों के अलावा बड़े पैमाने पर अन्तर्राष्टीय पर्यटकों से भी कमाई करता है, क्योंकि यह यूरोप के गिने-चुने शहरों में से है। जहां बड़ी तादाद में पूरे साल विदेशी सैलानियों का तांता लगा रहता है। जेनेवा में सैलानियों के लिए देखने को बहुत कुछ है। दुनिया के कुछ सबसे समृद्घ, पुराने और विशाल वानस्पतिक उद्यानों में से एक जेनेवा में है, जो विश्र्व का एक बड़ा वानस्पतिक शोध केंद्र है। जेनेवा की सांस्कृतिक जिंदगी बेहद रंगीन और समृद्घ है। बड़े-बड़े संग्रहालय, विशाल थियेटर और विश्र्व प्रसिद्घ म्युजिक कंजरवेटरी जहां तमाम अंतर्राष्टीय परफॉर्मेन्स प्रतिस्पर्धाएं सम्पन्न होती हैं, सैलानियों का बरबस ही मन मोह लेते हैं। जहां तक जेनेवा के इतिहास का सवाल है तो ईसा के 500 वर्ष पूर्व भी जेनेवा का आस्तत्व था। ईसा के बाद सन् 379 में जेनेवा रोमन साम्राज्य का हिस्सा था और बिशप की सीट। लेकिन कब इसका ईसाईकरण हुआ और कब यह रोमन सिटी बना इस बारे में कुछ स्पष्ट नहीं है। जर्मनी के आामण के बाद जेनेवा बरक्वांडियन साम्राज्य का हिस्सा बन गया और सन् 443 से 534 तक इसकी पहली राजधानी के रूप में मौजूद रहा।

जेनेवा में एक विशाल अंतर्राष्टीय हवाई अड्डा है, जो दुनिया के कुछ गिने-चुने व्यस्त हवाई अड्डो में से एक है। जहां दुनिया के हर कोने से दिन-रात फ्लाइटें आती-जाती रहती हैं। शहर के अंदर यातायात की शानदार व्यवस्था है, जिसमें लोकल टेनें, बसें, टॉली और स्टीट कार की व्यवस्था है। जेनेवा की बर्फ से ढकी खूबसूरत वादियों को देखने के लिए ज्यादातर सैलानी टॉली का सफर ही चुनते हैं। हाल के सालों में जेनेवा की विश्र्वविख्यात लोकेशनों को बॉलीवुड की फिल्मों में खूब फिल्माया गया है।

– संदीप तिवारी

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