मुल कमल पर चंदन चौकी भजन

मुल कमल पर चंदन चौकी
गणपत आसन धरीया
आसन मार हन्डक होय बैठा
साधसती वालाती रीया हरे
हरिजन बीना निवन कुन तिरीया
आदु पंत नीवन पत
मोटा साध सती वाला तिरीयारे हरिजन
बीना नवीन कुन तीरीया
नमो नमो म्हारा मात पीता ने उतपुत्त पालन करीया
नमों नमों इन धरती मातने जा पर बैठ सुधरीया
नमों नमों म्हारा गुरु देव ने
नाव-नाव बिचधरीया
नमों नमों इन संतरी संग तने
जम बैठ सुधरीया
नमों नमों म्हारा गरसाय बने होय इन्द्र होलरीया
उपर नीच बराबर बेरसें जाय नवीन वाई भरीया
भरीया जिकारा भर्म नहीं प्यापे खाली
नर खड़बड़या
भेला हुआ बड़ा-बड़ बीज न्यारा न्यारा बिकरीया
करनीरा कूड़ा कमाईरा काचा
गोला गगन से गुड़ीया
केहत कबिर सुनों भई सादु
अमृत प्याला फीरीया

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