रामो रामो पीपर पिछम रा राजा भजन

रामो रामो पीपर पिछम रा राजा।
गढ़ रूणेचाँ में, बाज रहया बाजा॥
म्हारो हेलो साम्भल, म्हारी अरजी साम्भल हो हो ए।
हेलो म्हारो साम्भोल रूणेचा रा राजा।
दादा रणसींह जी रा पोता, अजमाल जी रा लाल।
माता मेणादे लाल, रानी नेतल रा भरतार म्हारो हेलो साम लो॥ टेर ॥
बाँध ले रे ताँती बाणीया, राखजे विश्‍वास।
पुत्र जन्मेला, थारे नवे नवे मास॥ म्हारो हेलो॥
बाँध लिनी ताँती बाणायो, राखीयो विश्‍वास।
पुत्र जन्मों ज्योर, नवे नवे मास॥ म्हारो हेलो॥
आठ महीना रामा, धारी एक धारी।
नवें महीनों रामा, कर दी भलेरी॥ म्हारो हेलो॥
बाणीयो बिराणी रामा, रूणेचाँ में जाय।
चोरटो तो हेलो देन, हो गयो वारे लार॥ म्हारो हेलो॥
डूँगरिया री खिड़की उपर, बोल्या है मोर।
तीन बेवे जातरू, चौथो बेभे चोर॥ म्हारो हेलो॥
जंगी जंगी झाड़ी रामा, बीकमोड़ी भोम।
डेरो दियो करमों, बड़ी कूटोड़॥ म्हारो हेलो॥
चोर तो नहीं सेठाँ, म्हारा मायर बाप।
थारां तो मन मांही, आय गयो पाप॥ म्हारो हेलो॥
चोरटा रा मन मांहिं, आय गई रीस।
धड सूं तो न्यारो, मेल दियो शीष॥ म्हारो हेलो॥
उबी उबी अबला करे है पुकार।
छः महीना रो बालो, दियो दियो, खोश लियो भरतार॥ म्हारो हेलो॥
हरजी न पाबू, मेवो न मालो।
चढने रुणेचाँ सूं, बाबा रामदेवजी हालो॥ म्हारो हेलो॥
गऊ मारीयो हेलो, पीराँ सुन पायो।
चढ़ने रुणेचाँ सुं, बाबो रामदेवजी आयो॥ म्हारो हेलो॥
उबो रे रे चोरटा, कित्ती क दूर जाय।
म्हारा जातरू रो माल, कित्ताक दिन खाय॥ म्हारो हेलो॥
नेड़ो मती आईजे, लीला घोड़ा रा असवार।
खोस लूंला टारडो, थने जीवाँ दे ऊँ मार॥ म्हारो हेलो॥
बाणीयों तो छोड़े, रूप या अस्सी रे हजार।
चोरटो तो छोड़े दमड़ी, राखेला उधार॥ म्हारो हेलो॥
मुखड़ा आड़ो दिनों पीरां, आपरो रूमाल।
भख भख हँसे, रूणेचाँ रो नाथ॥ म्हारो हेलो॥
फोड़ दिवी आँखियाँ, कर दियो कोढ़यो।
दुनियाँ देखन र खातर, जीवतो ही छोड़यो॥ म्हारो हेलो॥
उठ ए बीराणी बाला, धड़ सूँ माथो जोड़।
बाणीयों उठेला थारो, आलस मोड़॥ म्हारो हेलो॥
शंख पंचायन रामा, मुखड़ा री बाणी।
चोटी तनी बाबो, राख दी सेलाणी॥ म्हारो हेलो॥
जात् रो मैं बाणीयों, बसूं हूँ मेवाड़।
सूरत रूणेचाँ में, मोहन गढ़ वास॥ म्हारो हेलो॥
लीलो घोड़ो नवलखो, ज्यारी मोतीयाँ जड़ी लगाम।
दलजी ने हर मिल्या, बिकमोड़ी भोम॥ म्हारो हेलो॥
संवत चौपना, भादखा रो मास।
दलजी तो होय गया भेग वारी लार॥

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