लिथोपस : एक पथरीला पौधा

दक्षिण आीका में एक विशेष प्रकार का अद्भुत पौधा पाया जाता है, जो रंग-रूप बनावट में ऐसा लगता है जैसे रंग-बिरंगे पत्थर पड़े हों। उस पौधे को लिथोपस कहते हैं। यह शब्द ग्रीस भाषा के दो शब्दों “लिथो’ तथा “आप्स’ से मिलकर बना है, जिसका मतलब होता है “पत्थर के समान चेहरा’। लिथोपस पौधा सिर्फ दो पत्तों का होता है।

ये दोनों पत्ते भी नीचे से आपस में जुड़े हुए रहते हैं। यह पौधा बहुत कम जगह घेरता है। ये पौधे दक्षिणी आीका के रेगिस्तानी इलाकों में उगते हैं क्योंकि इन्हें पानी की बहुत कम जरूरत रहती है। रेगिस्तान की चिलचिलाती धूप, गर्म लू जैसी परिस्थितियां इसके अनुकूल रहती हैं।

ये पौधे रंग-बिरंगे रंगों में, अलग-अलग आकृतियों में ऐसे लगते हैं मानो रंग-बिरंगे खूबसूरत पत्थर पड़े हुए हों। इन्हें देखकर ऐसा लगता है मानो किसी ने पत्थरों को तराश कर डिजाइनदार चित्रकारी, मीनाकारी से सजाया हो।

ये पौधे अनेक विविधतापूर्ण रंगों-लाल, केसरिया, सफेद, हल्का नीला, हल्का पीला आदि रंगों में पाए जाते हैं। कुछ तो विरोधी रंगों में भी सजे हुए रहते हैं, जैसे लाल रंग के लिथोपस के किनारों पर पीले रंग का बॉर्डर आदि। इसलिए इन्हें “फ्लावरिंग पेबल्स’ यानी फूलों के पत्थर, स्टोन प्लांट यानी पथरीला पौधा, लिविंग जेम्स यानी जीते-जागते जवाहरात भी कहते हैं।

इन पौधों में नवम्बर से मार्च तक 3 से 7 दिनों तक खिले रहने वाले फूल लगते हैं। इनके फूल भी गुलाबी, सफेद, पीले रंगों के खुशबूदार होते हैं। पत्थर-से दिखने के कारण ये पौधे पशु-पक्षियों से बचे रहते हैं। इनकी उम्र मनुष्यों से ज्यादा रहती है। ये 95 वर्ष पुराने भी देखे गए हैं।

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