हाय रे हाय तेरी बिंदिया रे….

कहते हैं कि बिंदिया नारी की सुंदरता को और बढ़ा देती है। बिंदिया का महत्व नारी की खूबसूरती में कितना है, इसका अंदाजा बिंदिया पर लिखे गए कई फिल्मी गानों से सहज ही लगाया जा सकता है। नारी के आभूषणों में बिंदिया का भी एक अलग स्थान है।

सोने-चांदी से बनी बिंदिया जहॉं खास अवसरों पर रूपसियों को भाती हैं, वहीं मस्तक पर विभिन्न रंगों से काढ़ी गई बंदियॉं आज हर आम महिला की सुंदरता में चार चांद लगाती हैं। अलग-अलग प्रान्तों में विभिन्न प्रकार की बिंदियां देखने को मिलती हैं। कहीं महिलाएँ अपने रिवाज के अनुसार बनी बिंदियॉं लगाती हैं, तो कहीं पर अन्य महिलाएँ बाजार में प्रचलित बिंदियों की विभिन्न श्रेणियों से अपना श्रृंगार करती हैं। बहरहाल यह तो कहा ही जा सकता है कि बिंदिया नारी का अमूल्य आभूषण है, जो अन्य आभूषणों की अपेक्षा बेहद सस्ती तो है ही, साथ ही यही आभूषण एकमात्र ऐसा आभूषण है, जिसके न रहने पर बाकी के सभी आभूषणों की चमक भी फीकी पड़ जाती है। वैसे तो नारी के माथे की बिंदी का चलन प्राचीन काल से ही चला आ रहा है। पहले जहॉं विवाहित स्त्रियॉं ही बिंदी लगाती थीं, वहीं अब अविवाहित लड़कियॉं भी इसे लगाने लगी हैं। बाजार में आज बिंदी के क्षेत्र में भी प्रतिस्पर्धा आ गई है और अब यह नए-नए आकारों तथा विभिन्न डिजाइनों में मिलती है। कहा जाता है कि प्राचीन समय में स्त्रियॉं बिंदी को शंख, दीपक, कलश, सूर्य व चांद की आकृति देने के लिए चंदन व केसर को घिस कर लगाती थीं। जैसे-जैसे समय बदला और इस क्षेत्र में आविष्कार हुए, वैसे-वैसे स्त्रियों ने अपनी बिंदियों में प्राकृतिक छटा को अपनाया, जिसमें उन्होंने फूल, पत्तियों को बिंदी के रूप में अपने माथे पर सजाया।

आज के आधुनिक युग में अनेक आकारों की जड़ाऊ स्टीकर बिंदियॉं भी उपलब्ध हैं, लेकिन कई बार संवेदनशील त्वचा पर स्टीकर बिंदी लगाने से माथे पर जलन हो जाती है व दाग बन जाते हैं। इससे बचने के लिए महिलाओं को चाहिए कि वह जलमिश्रित बिंदियों का प्रयोग करें। आजकल नयी डिजाइनों में बिंदी को लगाया जाता है, जिनमें सीधी रेखा, त्रिकोण, चौकोर, षटकोण, गोल, आड़ी-तिरछी रेखाओं को खींच कर सादी बिंदी को नए-नए आकारों में बदला जा सकता है। इस तरह माथे पर श्रृंगार पूर्ण करने के साथ-साथ अपनी कलात्मक अभिव्यक्ति को भी व्यक्त किया जा सकता है। किसी ने सही कहा है कि बिंदी एक ऐसा आभूषण है, जो स्त्रियों की सुंदरता में चार चांद लगा देता है।

– श्र्वेता

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