ताना शाहा बने दूल्हा

ताना शाहा बने दूल्हा

ताना शाह को अब भी समझ नहीं आ रहा था कि यह सब क्या हो रहा है? अब्दुल्लाह ने आगे बढ़कर ताना शाह को गले से लगा लिया। ताना शाह को महल ले जाया गया और कुछ ही समय में वह शाही दामाद की तरह तैयार हो गया। शादी की तैयारियां पूरी हो चुकी थीं, […]

देवताओं की काश्त किया करते थे कुल्लू के लोग

देवताओं की काश्त किया करते थे कुल्लू के लोग

कुल्लू के लोग जमीन के औपचारिक बंदोबस्त से पहले देवताओं के मुजारे थे। ये लोग देवताओं की जमीन से अनाज पैदा करते थे और बदले में उन्हें कर देते थे। कुल्लू में देवताओं का इतिहास बहुत प्राचीन है। इन देवताओं की अपनी एक अनूठी व्यवस्था है। प्रत्येक गांव का एक प्रमुख देवता है। उसके आगे […]

श्रृंगवेरपुर : जहॉं राम ने केवट से नाव मांगी थी

श्रृंगवेरपुर : जहॉं राम ने केवट से नाव मांगी थी

श्रृंगवेरपुर उत्तर-प्रदेश के जनपद इलाहाबाद की तहसील सोरॉंव में, इलाहाबाद शहर से तैंतीस किलोमीटर दूर इलाहाबाद-लखनऊ मार्ग पर मुख्य रोड से तीन किलोमीटर अंदर गंगानदी के किनारे स्थित है। राजस्व अभिलेखों में इसका नाम सिगरौर है। यहॉं ऋषि श्रृंगी (श्रृंगी) का आश्रम था (श्रृंगवेरपुर श्रृंगी ऋष्याक्षम, अध्यात्म रामायण टीका 5/7)। यहॉं ऋषि श्रृंगी एवं मॉं […]

इन्कलाब जिन्दाबाद के मायने

इन्कलाब जिन्दाबाद के मायने

“मार्डन रिव्यू’ के सम्पादक श्री रामानन्द चट्टोपाध्याय ने “इन्कलाब-जिन्दाबाद’ के शीर्षक से एक टिप्पणी लिखी। इसमें इस नारे को अराजकता और खून-खराबे का प्रतीक बताया और निरर्थक भी। भगत सिंह ने 23 दिसम्बर, 1929 को श्री रामानन्दजी को एक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने “इन्कलाब जिन्दाबाद’ के मायने स्पष्ट किये। भगतसिंह ने लिखा, “”आपने अपने सम्मानित […]

परिश्रम

परिश्रम

कहा गया है कि ईश्र्वर भी उसी की सहायता करता है, जो खुद अपनी सहायता करता है। यानी अपने कार्यों को पूरा करने के लिए परिश्रम करता है। यदि हम अपने हर कार्य के लिए ईश्र्वर के करने का इंतजार करें, तो ईश्र्वर शायद ही हमारी मदद करेगा। एक ग्रामीण हनुमानजी का भक्त था। एक […]

आत्म सम्मान

आत्म सम्मान

माशेंका-एक युवती, जिसने अपनी पढ़ाई समाप्त करने के पश्र्चात कुशकिन परिवार में गवर्नेस के रूप में पदार्पण किया था। एक शाम वह सैर से घर लौटी तो लगा कि भीतर कोहराम मचा हुआ है। बरामदे के द्वार पर ही नौकर मिहैलो का सुर्ख चेहरा मिला। उसे देखते ही माशेंका को शंका हुई कि भीतर कुछ […]

क्या सरदार भगतसिंह आतंकवादी थे

सरदार भगतसिंह को युवाओं का प्रेरणास्त्रोत माना जाता है, किन्तु हमारी सरकार के केन्द्रीय कर्मचारी चयन आयोग द्वारा अपने एक प्रश्न–पत्र में आजादी के बाद सरदार भगतसिंह को आतंकवादी जैसे शब्द से सम्बोधित किया गया, जो आजादी के दीवानों और क्रांतिकारियों के इतिहास को कलंकित करता है। इतना ही नहीं, एनसीईआरटी की किताबों में तो […]

जब सिर कटे व्यक्ति ने जल्लाद को मार डाला

राजस्थान का इतिहास राजपूत बहादुरों के अभूतपूर्व एवं अद्भुत शौर्य-गाथाओं से भरा पड़ा है। उन असंख्य गाथाओं में से एक अत्यंत मार्मिक, अविश्र्वसनीय और अद्वितीय गाथा मैं आपके समक्ष प्रस्तुत करने जा रहा हूं। जिस प्रत्यक्षदर्शी ने इस लोमहर्षक घटना को देखा है, उसने बड़े भरोसे से इसका वर्णन एक प्राचीन हस्तलिखित ग्रंथ में किया […]

मेरे रिश्तेदार

जेल की कालकोठरी में, गदर पार्टी के प्रथम अध्यक्ष बाबा सोहन सिंह भक्ना ने एक दिन भगतसिंह से पूछा, “”भगतसिंह तुम्हारे रिश्तेदार मिलने नहीं आये?” भगतसिंह बोले, “”बाबा जी, मेरा खून का रिश्ता तो शहीदों के साथ है, जैसे- खुदीराम बोस और करतार सिंह सराभा। हम एक ही खून के हैं। हमारा खून एक ही जगह […]

भगत सिंह की फांसी

भगत सिंह और उनके दोनों साथियों को फांसी लगने ही वाली है, यह सबको पता था। लेकिन उसे किसी तरह कुछ दिन के लिए रोकना चाहिए, जिससे व्यापक रूप में उन्हें फांसी से बचाने का प्रयत्न हो सके। यह लाहौर षडयंत्र केस-डिफेंस कमेटी के कानून-विशारदों की राय थी। इसका एक ही उपाय था कि भगत […]

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