अस्पतालों में घातक हो सकते हैं सेलफोन

its-dangerous-using-mobile-in-hospitalकई देशों के अस्पतालों में सेलफोन के इस्तेमाल पर रोक लगी हुई है, मगर कई डॉक्टर सेलफोन का उपयोग ऑपरेशन थिएटर तक में करते हैं, जो बहुत ही खतरनाक साबित हो सकता है। सेलफोन से निकलने वाले संकेत संवेदी मेडिकल उपकरणों के लिए भी नुकसानदायक होते हैं।

ताजा शोध का तकाजा है कि अस्पतालों में सेलफोन उपयोग संबंधी नियम और अधिक पुख्ता किए जाने चाहिए। इससे इन संवेदी मेडिकल उपकरणों की तो सुरक्षा होगी ही, साथ ही मरीजों को भी पूरी सुरक्षा प्रदान की जा सकेगी।

म्सटर्डम विश्र्वविद्यालय के ऐकेडमिक मेडिकल सेंटर के एरिक फान लीशाउट व उनके साथियों ने गहन चिकित्सा इकाई के 61 उपकरणों पर सेलफोन के असर का अध्ययन किया। इनमें कृत्रिम श्र्वसन यंत्र, सिरिंज पंप वगैरह शामिल थे। उन्होंने पाया कि 33 प्रतिशत यंत्रों पर सेलफोन के संकेतों का असर पड़ा। कई बार तो सेलफोन संकेतों के प्रभाव से यंत्र ने काम करना ही बंद कर दिया। यह भी देखने में आया कि कुछ यंत्रों के सुरक्षा अलार्म गड़बड़ हो गए। इस तरह के असर मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं।

उपकरणों पर असर के संदर्भ में जनरल पैकेट रेडियो सर्विस (जी.पी.आर.एस.) फोन ज्यादा खतरनाक पाये गये। ये 3 मीटर की दूरी से भी असर डालते हैं। इसके विपरीत युनिवर्सल मोबाइल टेलीकम्युनिकेशन सिस्टम (यू.एम.सी.एस.) का असर तभी होता है, जब फोन किसी उपकरण से चंद सें.मी. दूरी पर हो।

फान लीशाउट का कहना है कि सुरक्षा की दृष्टि से कई अधिकारियों ने सेलफोन इस्तेमाल की एक रेखा तय की है, जिसे हमेशा अनदेखा किया जाता है। यह बहुत दुःख की बात है कि मरीजों की जान बचाने वाले खुद ही इतने लापरवाह हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि जो डॉक्टर्स ऐसा करते हैं, वे मरीज के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं।

 

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