एक सफल कमाई महाराज, भर थरी थारी हो भर भरी थारी भजन

एक सफल कमाई महाराज, भर थरी थारी हो भर भरी थारी।
मालिक रे कारण, जोग फकिरी धारी॥ टेर ॥
एक भारत खण्ड में हो गये भरथ पँवारी।
ज्यानें मिलीया गोरखनाथ, ज्ञान गुणधारी॥ 1 ॥
राजा गयो जंगल रे माहि, पाड रहयो हेला।
ज्यानें मिलीया गोरखनाथ, मुँड लियो चेला॥ 2 ॥
राजा आयो महल रे मांहि, तृष्णा जागी।
ज्यानें मिलीया गोरखनाथ, भ्रमणा भागी॥ 3 ॥
राजा गयो महल रे मांहि, लगायो फेरी।
भिक्षा डालो पिंगल माय, हो रही है देरी॥ 4 ॥
रानी उबी महल रे मांहि, लट्टिया तोडे।
रानी धरियो हाथ पे हाथ, प्रीत काँई तोडे॥ 5 ॥
रानी उबी महल रे मांहि, कलप रही काया।
गुरु मरजो गोरखनाथ, राज छुडवाया॥ 6 ॥
रानी मत दे गुरासा ने दोष, गुरासा म्हारा साँई।
लिख दिया विधाता, लेख टलन का नाहीं॥ 6 ॥
एक गँगा यमुना, बेवे कायां मांहि।
जस गावे भरोनाथ जान गँवाई॥ 7 ॥

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