खूंखार होते भारतीय

डॉ. दीपक के. देसाई, डॉ. जयंत पटेल, आनन्द जॉन, सुभाष चन्दर और हरीश पटेल। …इन पांच लोगों में आखिर क्या समानता है? कई समानताएं हैं। सबसे पहले तो ये पांचों अमेरिका में रहने वाले अनिवासी भारतीय हैं। दूसरी समानता यह है कि इन लोगों ने भारत के छोटे-छोटे शहरों और गांवों से आकर अमेरिका में अपनी शानदार सफलता की पटकथा लिखी है। लेकिन तीसरी और आखिरी जो सबसे बड़ी समानता है, वह यह है कि इन पांचों ने अमेरिका को अपने खौफ से हिलाकर रख दिया है।

जी, हां! दशकों से अमेरिका में जा बसने वाले हिन्दुस्तानियों की तस्वीर बहुत मासूम और भोली रही है। सज्जन, डरपोक और प्रतिभाशाली। सालों से भारतीय इसी रूप में अमेरिका में जाने जाते रहे हैं। यही वजह है कि अमेरिका में पहुंचे दुनिया के कई मुल्कों और हिस्सों के लोगों के मुकाबले हिन्दुस्तानी कहीं ज्यादा सफल रहे हैं। अमेरिकियों को इनके साथ सामंजस्य बिठाना भी दूसरी नस्ल और कौम के लोगों के मुकाबले ज्यादा आसान रहा है। अमेरिका में कोई 25 लाख भारतीय रह रहे हैं। पिछले साल इन भारतीयों ने अपने मुल्क को 270 लाख डॉलर भेजे।

एक अनुमान के मुताबिक अमेरिका में मौजूद 7300 टेक्नो कंपनियां विदेशियों द्वारा स्थापित की गई हैं। इनमें 26 फीसदी कम्पनियां अकेले भारतीयों की हैं, जो किसी भी देश के लोगों के मुकाबले ज्यादा हैं। अमेरिका में और अमेरिका के बाहर विदेशों में मौजूद बड़ी-बड़ी अमेरिकी कम्पनियों में लगभग 14 फीसदी भारतीय सीईओ (मुख्य प्रशासनिक अधिकारी) या इसके समकक्ष हैं। अमेरिका में 38 प्रतिशत डॉक्टर, 36 प्रतिशत वैज्ञानिक (नासा में कार्यरत कुल वैज्ञानिकों में 34 प्रतिशत, माइाोसॉफ्ट के कुल कर्मचारियों में 28 फीसदी, आईबीएम और इंटेल में 17 फीसदी कर्मचारी भारतीय हैं।) भारतीय हैं। इस तरह अमेरिका में 25 लाख ताकतवर भारतीयों का समूह बसता है। स्वाभाविक रूप से यह एक बड़ी ताकत है। अमेरिका में बसे भारतीयों की औसतन सलाना आय 61,322 डॉलर है। जबकि औसत अमेरिकियों की सलाना आय महज 41,994 डॉलर ही है।

लेकिन यह कोई चौंकाने वाला तथ्य नहीं है क्योंकि भारतीय यहां हमेशा से अमरीकियों के मुकाबले ज्यादा कमाते रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि पहले यहां भारतीय कमाऊ होने के साथ-साथ सज्जन, डरपोक और शांतिप्रिय हुआ करते थे। उनकी अब वह तस्वीर नहीं रही। आज भारतीय अपराधी, घोटालेबाज, दबंग और निर्मम हत्यारों के रूप में भी जाने जाने लगे हैं। यही वजह है कि अब भारतीयों की चर्चा अमेरिकी अखबारों के अपराध वाली खबरों के पृष्ठ में जमकर होने लगी है। इस साल मार्च में अमेरिका में बसे भारतीयों के लिए स्तब्ध कर देने वाली सुर्खियां वो रहीं, जब अखबारों में मोटे-मोटे अक्षरों में यह छपा कि भारतीय मूल के डॉ. दीपक के. देसाई ने 40 हजार से ज्यादा लोगों की जिन्दगी को जबरदस्त खतरे में डाल दिया है।

डॉ. दीपक को एक ही सिरिंज का कई बार इस्तेमाल करते पाया गया, जो कि लोगों की जिन्दगी से जबरदस्त खिलवाड़ है। अमेरिका ही नहीं पूरी दुनिया में डॉक्टरों को सख्त हिदायत दी गई है कि एक सिरिंज का एक ही बार इस्तेमाल किया जाये। लेकिन डॉ. दीपक एक ही सिरिंज से कई मरीजों को इंजेक्शन लगाता था। शायद यह खूंखार डॉक्टर अब भी पकड़ में नहीं आता अगर उसके लॉस वेगास स्थित क्लीनिक में इलाज कराने वाला एक मरीज हेपेटाइटस-सी वाइरस का शिकार न गया होता। डॉ. देसाई के यहां इलाज कराने वाला एक और मरीज एड्स एचआईवी का शिकार हो गया। इन दोनों ही दिल दहला देने वाली घटनाओं के पीछे कारण रहा, सिरिंज का बार-बार और कई रोगियों में इस्तेमाल।

अमेरिका के इतिहास में किसी डॉक्टर द्वारा की गई यह अब तक की सबसे बड़ी लापरवाही है, जिसके कारण हजारों लोग दहशत के घेरे में आ गए हैं। हजारों ऐसे लोगों ने जिन्होंने कभी किसी भी रोग का इलाज डॉ. देसाई के क्लीनिक में कराया है, अपना एचआईवी टेस्ट करा रहे हैं, यह जानने के लिए कि कहीं वह एड्स जैसी जानलेवा बीमारी का शिकार तो नहीं हो गए। छः लोग हेपेटाइटस-सी का शिकार पाए गए। इन छः में से पांच लोगों नेे डॉ. देसाई के दक्षिणी नेवादा स्थित इन्डोसकॉपी सेन्टर में एक ही दिन इलाज करवाया था। यह पिछले साल सितम्बर की बात है। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद डॉ. देसाई के मालिकाने वाले ज्यादातर क्लीनिक बंद कर दिए गए। बंद होने वालों में पांच ऐसे क्लीनिक भी रहे, जो डॉ. देसाई के तो नहीं हैं मगर ये डॉ. देसाई के क्लीनिक से संबद्घ थे।

भारत के एक छोटे-से गांव से अमेरिका पहुंचना और वहां अपना एक मेडिकल साम्राज्य स्थापित कर लेना, डॉ. देसाई की सक्सेज स्टोरी रही है। लेकिन यह अब सफलता शक और सवालों के घेरे में है। लॉस वेगास रिव्यू जनरल में छपी इस कहानी में अब वाक्य दर वाक्य आशंकाओं और षड्यंत्रों की प्रेत छाया दिखती है। दबी जुबान इस पूरी रिपोर्ट में यह भी निष्कर्ष निकाला गया कि देसाई ने वैसा ही घोटाला किया है जैसा कि आमतौर पर तीसरी दुनिया के लोग किया करते हैं। इस पूरे घोटाले में अब एक खतरनाक पहलू उभरकर यह आ रहा है कि देसाई किसी बड़े बीमा घोटाले का सूत्रधार तो नहीं है? अगर ऐसा पाया गया तो न सिर्फ देसाई बल्कि तमाम भारतीय डॉक्टरों को शक की निगाहों से देखा जाने लगेगा। देसाई से उसका मेडिकल लाइसेंस जब्त कर लिया गया है। उसका पासपोर्ट भी जब्त किया गया है। इसका मतलब यह है कि लॉ और इन्फोर्समेंट विभाग भी देसाई पर नजर रखे हुए है।

लेकिन डॉ. देसाई अकेला वह शख्स नहीं है, जिसने पिछले कुछ सालों में विदेश में बसे भारतीयों का सिर नीचा किया है। एक और डॉक्टर इन दिनों अमेरिकियों की नजरों में खलनायक बनकर उभरा है। इस डॉक्टर का नाम जयंत पटेल है। इसका किस्सा देसाई से भी ज्यादा खूंखार है। अवैध तरीके से मानव अंगों के कारोबार में सम्मिलित पाये गये इस डॉक्टर को तो अमेरिकी प्रेस और यहां के लोगों ने “डॉक्टर डेथ’ का नाम ही दे दिया है। वैसे डॉ. डेथ फिल्हाल ऑस्टेलिया में अपने ऊपर लगे आरोपों से संबंधित मुकदमा लड़ रहा है। जयंत पटेल पर आरोप है कि उसने घोर लापरवाही और हैवानियत के चलते 13 मरीजों को मौत के घाट उतार दिया है। पटेल को एफबीआई ने 11 मार्च, 2008 को उसके पोर्टलैंड (ओरेगान) स्थित घर से पकड़ा था।

भारत में जामनगर में पैदा हुआ डॉ. जयंत पटेल सन् 1977 में अमेरिका गया था। उसे अभी तक के अनुमान के मुताबिक लगभग 100 साल की सख्त जेल हो सकती है। उस पर ऑस्टेलिया में जो खतरनाक आरोप लगे हैं उनमें तीन आरोप मानव हत्या के, तीन जान बूझकर शरीर को नुकसान पहुंचाने के, दो लापरवाही के और सात फ्रॉड के तथा एक फ्रॉड की कोशिश का है। डॉ. पटेल ने सर्जरी की डिग्री सौराष्ट विश्र्वविद्यालय से ली थी और एडवांस टेनिंग रोचेस्टर स्कूल ऑफ मेडिसिन से हासिल की थी।

पटेल पहले भी अपनी सर्जिकल प्रैक्टिस के दौरान कई गंभीर किस्म की खामियॉं कर चुका है। यहां तक कि सन् 1984 में उस पर 5 हजार डॉलर का जुर्माना भी लग चुका है और तीन साल के लिए उसे दोबारा से क्लीनिकल प्रोबेशन पर भेजा गया था। इसके बाद ही रोगियों की सर्जरी की अनुमति का लाइसेंस दिया गया। 2001 में डॉ. जयंत पटेल को न्यूयार्क राज्य की सरकार ने अपना मेडिकल लाइसेंस सरेंडर करने के लिए आदेश दिया था। उसके पहले ही 2000 में ओरेगान बोर्ड ऑफ मेडिकल एग्जामिनर्स द्वारा पटेल को पूरे राज्य में कहीं प्रैक्टिस न करने का आदेश दिया गया, क्योंकि डॉ. पटेल द्वारा उपचारित चार में से तीन लोग मर गये थे।

सिर्फ डॉक्टर ही खलनायक नहीं बन रहे हैं, दूसरे समुदायों में भी तेजी से खलनायक उभर रहे हैं। एक जाने-माने भारतीय डिजाइनर आनन्द जॉन पर 15 से 27 साल की 30 महिलाओं के साथ बलात्कार, सेक्सुअल मारपीट आदि का आरोप लगा है। गौरतलब है कि डिजाइनर आनन्द जॉन ने ये तमाम हरकतें आरोप के मुताबिक नवम्बर, 2002 से मार्च, 2007 के बीच कीं। आनन्द जॉन लॉस एंजेल्स का रहने वाला डिजाइनर है और इन विभिन्न आरोपों के तहत एक साल पहले गिरफ्तार किया गया था। उसे छोड़ा तब गया जब 13 लाख अमेरिकी डॉलर का एक बांड उसने भरा। लेकिन पिछले अक्टूबर में फिर एक बार उसे गिरफ्तार कर लिया गया। भारत में जन्मे आनन्द जॉन पर बलात्कार और सेक्सुअल मारपीट के 59 आरोप, 20 महिलाओं द्वारा लगाये गए, जिसमें दो बहुत कम उम्र की महिलायें हैं जिनकी उम्र मात्र 15 से 17 साल है। इसी तरह पिछले साल नवम्बर में न्यूयार्क राज्य की पुलिस ने अपनी निजी जांच-पड़ताल के आधार पर आनन्द जॉन पर बलात्कार के 40 आरोप लगाए। इन आरोपों में 2002 से 2006 के बीच किए गये बलात्कार सेक्स एब्यूज तथा संबंधित आरोप रहे। हालांकि जॉन ने अपने ऊपर लगाए गए इन तमाम आरोपों को खारिज किया है। लेकिन फैसला तो अदालत करेगी।

जॉन ने कई सेलिब्रिटीज के कपड़े डिजाइन किये हैं। जिनमें पेरिस हिल्टन, जैनेट जैक्शन, माइकल रॉडिक्स, इवांका टम्प और मैरी जे. ब्लिग जैसे बड़े नाम शामिल हैं। जॉन को पुलिस ने पिछले साल मार्च में उसके बेवर्ली हिल्स अपार्टमेंट से गिरफ्तार किया। जॉन ने फैशन की दुनिया में लम्बी लाईन वाली जीन्स का चलन शुरू किया था। जॉन ने म्यूजिक चैनल वीएच-1 में एक रियलिटी शो अमेरिकन्स नेक्स्ट टॉप मॉडल में भी हिस्सा लिया था।

अपराधों में लिप्त भारतीयों का एक और उदाहरण तब सामने आया, जब 57 वर्षीय सुभाष चन्दर ने अपने से नीची जाति में बेटी द्वारा शादी कर दिये जाने के बाद उसके ऊपर गैसोलीन डालकर आग लगा दी। सुभाष चन्दर ने अपने दामाद और तीन साल के नाती को भी जलाकर मार डाला। शिकागो के ओक फॉरेस्ट इलाके में रहने वाले सुभाष चन्दर ने अपने ही घर के पिछवाड़े इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया। उसने इस खूंखार वारदात में अपनी गर्भवती बेटी को जलाकर मार डाला। चन्दर फिलहाल हिरासत में है। यह निहायत वीभत्स नरसंहार है जिसमें एक अजन्मे बालक सहित तीन लोगों की हत्या कर दी गई। हैरत कर देने वाली बात यह रही कि यह पांच महीनों के भीतर शिकागो में घटी ऐसी तीसरी वारदात थी, जो लगभग एक जैसी थीं। इसके पहले शिकागो में ही 34 वर्षीय कौशिक पटेल पर प्रथम श्रेणी का हत्या अपराध दर्ज हुआ, जब उसने अपने दो बेटों (7 और 4 वर्षीय) को गैसोलीन से जला कर मार डाला। दोनों बच्चों की अस्पताल में मौत हो गई।

जब कौशिक से पुलिस ने पूछताछ की तो उसका कहना था कि अपने बच्चों को मारने का उसका कोई इरादा नहीं था। वह तो अपनी सास से परेशान था, जो बेबात पर उसका दिमाग खाती थी। इस वजह से वह खुद को गैसोलीन से जलाकर मार डालना चाहता था। लेकिन किसी को भी उसकी यह बात गले नहीं उतर सकती। जो व्यक्ति खुद को जलाकर मार डालना चाहता हो, उस पर जरा-सी खरोंच भी न आए और दूसरे लोग मर जायें, इसी तरह का एक और मामला दिलदहला देने वाला है। 32 वर्षीय निमिषा तिवारी ने बेडरूम में सो रहे दो बच्चों को आग से मार डाला। इन दोनों बच्चों की उम्र चार साल और एक साल थी। उसने इस बच्चों को अपनी वैवाहिक जिंदगी में लगातार परेशानियों के कारण मार डाला। उसका पति आनन्द तिवारी उसे छोड़ देने का फैसला कर चुका था। इसी के गुस्से और अवसाद में उसने यह भयानक कदम उठाया।

विदेशों में भारतीय हमेशा से सुर्खियां बटोरते रहे हैं, अपनी सफलताओं और प्रतिभा के लिए। किंतु अब ऐसा लगता है कि उन सुनहरे दिनों की याद महज अतीत का हिस्सा बन कर रह गई है। क्या अब विदेशियों के बीच भारतीय अपनी उस छवि को बरकरार रख पाएंगे, जो कभी हुआ करती थी? शायद नहीं।


 

बेचारी वनलता पटेल

एक अकेले जॉन या पटेल या इसी तरह के कुछ गिने-चुने लोगों का किस्सा नहीं है। हाल के कुछ सालों में तमाम खूंखार किस्म के अपराधों में भारतीयों का नाम उभर कर सामने आया है। इस साल 17 जनवरी को फायर फाइटर्स ने एक जली हुई लाश पाई। कई दिनों तक यह पता नहीं चल पाया कि आखिर यह किसका शव था। पांच दिनों के बाद डीएनए टेस्ट के जरिए पता चला कि फायर फाइटर्स ने जो शव बरामद किया था, वह भारतीय मूल की एक अमेरिकी 57 वर्षीय वनलता पटेल का है, जो 16 जनवरी को गायब हो गई थीं बगल के उत्तरी कैरोलिना राज्य से। तकरीबन एक महीने तक की गई खुफिया छानबीन के बाद पुलिस ने 60 वर्षीय हरीश पुरुषोत्तम दास पटेल को गिरफ्तार किया, जो कि उस अज्ञात महिला वनलता पटेल का पति था। उस पर हत्या का आरोप दर्ज हुआ। पटेल की शादी सन् 1996 में हुई थी और इससे पहले हुई उसकी शादी से उसके वयस्क बच्चे हैं। पिछले साल सितंबर में ये अलग हो गए। नवम्बर में वनलता पटेल ने तलाक का मामला अदालत में दायर किया, जिस दिन वह गायब हुई, उस दिन शायद वह रैलीग इन्टरनेशनल एयरपोर्ट से टोरंटो की फ्लाइट पकड़ने जा रही थी। उसका बेटा अल्बेटा (कनाडा) में रहता है। लेकिन वह बेटे के पास कभी नहीं जा सकी। अदालत के तथ्य यह जताते हैं कि पटेल का अपने पति के साथ वित्तीय परिसम्पत्तियों के बंटवारे को लेकर विवाद चल रहा था। गौरतलब है कि दोनों का स्विस बैंक में एक संयुक्त खाता है जिसमें चार लाख डॉलर जमा हैं। वनलता को उसके मां-बाप ने एक लाख डॉलर के गिफ्ट भेंट किए थे। इन तमाम मामलों को लेकर दोनों के बीच तनाव था। पटेल अपनी पत्नी को अदालत के बाहर निजी सहमति से तलाक देने की कोशिश में था, यह अनुमान उन दस्तावेजों से लगा, जिनसे यह पता चलता है कि दोनों के बीच तलाक को लेकर लगभग रजामंदी हो चुकी थी।

लेकिन पुलिस की खुफिया छानबीन से पता चला कि जिस दिन वनलता पटेल गायब हुई थी, उसी दिन उसके पति हरीश पटेल ने गैसोलीन खरीदी थी। जबकि पूछताछ में हरीश पटेल ने इससे इन्कार किया। इससे पुलिस का शक और गहरा गया। पुलिस के पास गैसोलीन खरीदे जाने के पक्के सबूत थे। अतः हरीश पटेल गिरफ्त में आ गया और असलियत से पर्दा उठ गया। इस समय वह वेक काउंटी जेल में अपनी सजा का इंतजार कर रहा है।

–     धीरज बसाक

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