भजो श्री व्यंकटेश बाला, भजो श्री लक्ष्मणजी बाला भजन

भजो श्री व्यंकटेश बाला, भजो श्री लक्ष्मणजी बाला
अटल राज महाराज धणी का, सदा बोल बाला॥ टेर ॥
चार जना मिल मत्तो विचारियो, चालो दक्षिण चालाँ।
चौथी पाती बालासाब की, माल मोकलो लावाँ॥ 1 ॥
फाटी अँगरखी फाटा वस्त्र, नहीं पावों में जोडा।
हुक्म होय श्री बाला साब का, चढन मिल्या घोडा॥ 2 ॥
पहली आया ब्राह्मण बनीयाँ, पीछे सेवक नाई।
चार जात् की निन्दा करे, ज्यानें खावे कालका माँई॥ 3 ॥
चार गाँव में चार देवरा, चारों शीव का थाना।
नासिक त्रिमुखी गँगा बेवे, गोदावरी का नहाना॥ 4 ॥
पँडरपुर में पँडरिक राजा, तुल्जापुर में माँई।
देवलपुर में बसे बालासा ज्यारी जोत् सवाई॥ 5 ॥
नदी नाला बाला खोला, जाँ बाला रखवाला।
सकल सकल सब भजा करो, श्री व्यंकटेश बाला॥ 6 ॥
मारवाडी भण्डारो करता, ब्राह्मणों की छाया।
साधु सन्त ने भोजन दिखना, घणी चौगनी माया॥ 7 ॥
मारवाड को तेजो ब्राह्मण, जन्म रूणींचा पाया।
हुक्म होय श्री बाला साहब का, छन्द जोडकर गाया॥ 8 ॥

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