भीष्म बनने में किसी नाटकीयता का सहारा नहीं लिया

अपनी पहली फिल्म जान तेरे नाम से युवाओं के दिलों में डांसिंग स्टार की छवि बनाने वाले अभिनेता रोनित रॉय के बारे में आज कहना मुश्किल है कि वे टीवी के लिए ज्यादा मुफीद हैं या फिल्मों के लिए। लेकिन टीवी पर सबसे महंगे कहे जाने वाले एकता कपूर के इस चहेते अभिनेता को इतनी लोकप्रियता मिलने के बावजूद उसकी सादगी नहीं जाती। वे अब तक के टीवी की दुनिया के सबसे स्टायलिश अभिनेता हैं और टीवी की दुनिया में दिए जाने वाले पुरस्कारों में सबसे अधिक पुरस्कार जीतने वाले। वे मानते हैं कि उन्होंने अब तक टीवी पर जो चरित्र निभाए उनमें सबसे अधिक चुनौती भरा महाभारत के भीष्म का चरित्र है। वे कहते हैं, “यह लार्जर देन लाइफ कैरेक्टर है। मैंने इसे निभाने के लिए किसी पुराने शो की मदद नहीं ली।

बावजूद इसके लोगों में इसकी तथ्यात्मकता और प्रस्तुतीकरण को लेकर संशय है?

ऐसी बात नहीं है। लोग कहते हैं कि यह रोमन ग्रीको शैली में बनाया गया महाभारत है, पर मुझे समझ नहीं आता कि महाभारत के जो योद्घा इतने ताकतवर और शक्तिशाली थे वे अगर शारीरिक रूप से मजबूत नहीं दिखते होंगे, तो कैसे दिखते होंगे? जहां तक इसकी तथ्यात्मकता को लेकर प्रश्र्न्न है तो महाभारत की जो टीम रिसर्च में लगी है उसने कोई भी ऐसा तथ्य नहीं छोड़ा है जिसे हम गलत कह सकें। यह केवल देखने में एक नए किस्म का महाभारत ़जरूर लग सकता है पर इसका आधार वही है जो हजारों साल पहले था।

महाभारत में आपका भीष्म का चरित्र सबसे महत्वपूर्ण है आप उसे कैसे देखते हैं?

मैं पिछले दिनों इंटरनेट पर महाभारत संबंधी तथ्यों की खोज कर रहा था। लंदन के एक इतिहासकार ने लिखा है कि महाभारत में भीष्म की अब तक निभायी गयी भूमिकाओं में मेरी भूमिका सबसे अधिक प्रभावशाली है।

कहा जा रहा है कि आपके संवाद और शारीरिक भाषा में भी मुकेश खन्ना जैसी गमक नहीं है?

(हंसते हैं) मैं किसी की बराबरी नहीं कर रहा। वे बड़े अभिनेता हैं। मैं केवल इतना कहना चाहता हूं कि पिछले भीष्म का चरित्र काफी लाउड़ था। यह सही है कि उनके चरित्र की गमक उनके संवादों की आदायगी और विशाल शारीरिक संरचना का परिणाम भी थी लेकिन मेरे चरित्र की शांति और उसकी शारीरिक भाषा भीष्म के अलग स्वरूप को दिखाने वाली है। यह कुछ-कुछ श्याम बेनेगल की डिस्कवरी में दिखाए गए महाभारत के करीब है जहॉं पात्र सोने के मुकुट नहीं पहने दिखायी देते। इसकी संवाद अदायगी के लिए मैंने अपनी हिन्दी और उच्चारण पर बहुत मेहनत की है।

आपने अपने पूरे कॅरियर में जो मेहनत की उसका परिणाम टीवी ने ही आपको दिया?

कह नहीं सकता। मैंने जान तेरे नाम जैसी हिट फिल्म से अपने कॅरियर की शुरुआत की लेकिन उसके बाद फिल्में नहीं चलीं। हाल ही में मैंने किसना, मेधा और पॅंख जैसी फिल्में भी की लेकिन जो कुछ टीवी ने मुझे दिया वह शायद फिल्मों से नहीं मिला।

इसमें एकता के क्योंकि को आप महत्वपूर्ण मानते हैं?

हॉं। मैंने दूरदर्शन के शो फूल और कांटे के बाद सुराग जैसे शोज से टीवी पर काम शुरू कर दिया था लेकिन जो लोकप्रियता मुझे क्योंकि के मिहिर और कसौटी के ऋषभ बजाज ने दी वह कसी शो से नहीं मिली। मैंने दूरदर्शन के चित्रहार जैसे शो का निर्देशन भी किया था।

 

क्या होगा एकता के महाभारत का हश्र

सूत्रों के अनुसार एकता के “महाभारत’ के जल्दी ही बंद होने की संभावना है। वैसे चैनल या बालाजी ने अधिकारिक तौर पर इस बात की पुष्टि नहीं की है, लेकिन फिल्म सिटी में धारावाहिक के लिये निर्मित सेट भी तोड़ने से इस बाबत संकेत ़जरूर मिलते हैं। दरअसल, शुरुआत से ही दर्शकों को शक-सा था कि एकता महाभारत की कहानी को भी सामान्य सास-बहू वाले पैमाने में फिट करके परोसेंगी। शो के शुरू होने पर, शक सही निकला और एकता को तीखी आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा। चैनल से जुड़े सूत्रों के अनुसार, महाभारत के एक-एक एपिसोड के लिए तकरीबन सवा करोड़ रु. के आसपास खर्च हो रहा है। इस प्रकार सप्ताह में पॉंच दिन प्रसारित होने वाले इस शो पर हफ्ते के छह करोड़ तथा महीने के 24 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं।

अब पैसा तो बेतहाशा खर्च हो रहा है लेकिन उस हिसाब से परिणाम साकारात्मक नहीं आ रहे हैं। अतः महाभारत को बंद करने का निर्णय लिया गया है। इस बारे में बालाजी ने सेट तुड़वाने की बात तो मानी है लेकिन साथ में यह भी बताया कि यूनिट आउटडोर शूटिंग के लिये जा रही है। कब जा रही है, इस बारे में कुछ नहीं बताया। दरअसल, एकता का महाभारत चैनल की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा है। इतने बड़े पैमाने पर बनाये गये इस भव्य शो की टीआरपी मात्र 2.2 ही है, तो फिर शो जारी रखने का क्या तुक है?

 

– रोनित रॉय

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