सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर यानी मानसून का मर्ज

seasonal-effective-disorderसीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर (सैड) एक किस्म का डिप्रेशन है, जो हर साल एक ही समय व्यक्ति को अपना शिकार बनाता है। सैड होने पर व्यक्ति न सिर्फ डिप्रेशन के लक्षण प्रदर्शित करता है बल्कि उसे न समझ में आने वाली थकन भी महसूस होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब दिन की रौशनी में व्यक्ति का एक्सपोजर कम हो जाता है तो इस पर जो दिमाग की प्रतििाया होती है, उससे डिप्रेशन उत्पन्न होता है, जिसे सैड कहते हैं। धूप की कमी अक्सर मानूसन में होती है। इसलिए सैड का मानसून से सीधा ताल्लुक है। इसलिए सवाल यह है कि जब सैड आपकी तमाम ऊर्जा को खींच ले और मानसून भी अपना रंग दिखाने लगे तो आप जोश व उमंग को वापस कैसे लायें?

सैड क्यों होता है? इस पर जो आधुनिक थ्योरी है, उसका फोकस धूप की भूमिका पर है। धूप दिमाग में कई मुख्य हार्मोन उत्पन्न करने का काम करती है। इसलिए जो सैड से पीड़ित हो जाता है, वह अपनी सामान्य अहसास व हरकत में अनेक परिवर्तन दर्शाता है।

सैड के लक्षण वैसे ही होते हैं, जैसे कि डिप्रेशन के। जिसमें शामिल हैं मूड में बदलाव, आनन्द की कमी का अहसास, ऊर्जा के स्तरों में कमी, स्लीप पैटर्न में परिवर्तन, एकाग्रता में कठिनाई और सोशलाइजिंग में कम समय व्यतीत करना। अब अगर आपमें इस किस्म के लक्षण दिखायी दे रहे हैं तो आप सैड से ग्रस्त हैं और इसे दूर करने के तरीके यह हैंः

अधिक मैग्नी़िजयम लें

संतुलित आहार से यह सुनिश्र्चित हो जाता है कि आपके जिस्म की सभी जरूरतें पूरी हो रही हैं। इसके बावजूद भी अगर आप यह महसूस कर रहे हैं कि ऊर्जा की कमी है, थकान है तो इसकी वजह मैग्नी़िजयम की हल्की कमी हो सकती है। हमारे शरीर को मैग्नी़िजयम की जरूरत 300 से अधिक बॉयो रासायनिक िायाओं के लिए होती है। इनमें से एक है, ग्लूकोज को तोड़कर उसे ऊर्जा में बदलना। एक अध्ययन से यह भी मालूम हुआ है कि जिनके शरीर में मैग्नी़िजयम की कमी होती है, उन्हें रोजमर्रा के जिस्मानी कामों के लिए अधिक ऑक्सीजन की आवश्यकता पड़ती है जिससे वह थकान व बुझापन महसूस करते हैं। रोजाना की मैग्नी़िजयम पूर्ति करने के लिए बादाम और काजू खायें।

वॉक पर जायें

आप सोचते हैं कि थकाने के बाद अगर आप वॉक पर जायेंगे या कोई और कड़ी जिस्मानी मशक्कत करेंगे तो आप और अधिक थक जाएंगे। अगर आप ऐसा सोचते हैं तो आप गलत सोचते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वॉकिंग जैसी जिस्मानी मशक्कत वास्तव में आपके ऊर्जा स्तर को बढ़ा देगी। एक प्रयोग में यह निष्कर्ष निकला कि 10 मिनट की वॉक न सिर्फ ऊर्जा स्तर को बढ़ा देती है, बल्कि मूड भी बहुत अच्छा कर देती है। इसलिए अगली बार जब आप थकान महसूस करें या उदासी आप पर छा जाए तो बाहर निकलें और वॉक पर चलें जायें।

गहरी नींद

आज की बहु-कार्य शैली में जानकारी की जरूरत से ज्यादा अधिकता हमारे दिमाग को क्षमता से अधिक काम करने पर मजबूर कर देती है और हमारे ऊर्जा स्तर को भी कम कर देती है। बहरहाल, हाल के अध्ययनों से मालूम हुआ है कि 60 मिनट की पावर नैप (गहरी नींद) हमारी याद्दाश्त को तेज कर देती है और उस तनाव को कम कर देती है, जो रोजमर्रा की गतिविधियों के ओवरलोड से आता है।

खाना न छोड़ें

बिना किसी शक के नाश्ता दिन का सबसे महत्वपूर्ण मील है। यह मूड को बेहतर करता है और दिनभर हमारे ऊर्जा स्तर को बरकरार रखता है। लेकिन अध्ययनों से मालूम हुआ है कि बाकी समय के खाने भी इतने ही महत्वपूर्ण हैं। नाश्ते से दिन की शुरूआत होती है। लेकिन अगर आप बाकी वक्त के भोजन छोड़ देंगे तो आपका जिस्म शाम होते-होते थकान महसूस करने लगेगा।

तनाव और गुस्सा कम करें

ऊर्जा स्तर में कमी होने की सबसे बड़ी वजह है तनाव। जो चिंताएं आपको घेरे हुए होती हैं, वह बहुत अधिक ऊर्जा का इस्तेमाल कर लेती हैं, भले ही आपने ज्यादा काम न किया हो, पर आपको मानसिक व शारीरिक रूप से थका देती हैं। दबे हुए ऊर्जा स्तर का भी हमारे शरीर पर सही प्रभाव पड़ता है। अपने रोजमर्रा के कार्याम में रिलैक्सेशन गतिविधियां शामिल कर लें। साथ ही नियमित वर्क-आउट से उन रसायनों को बाहर निकाला जा सकता है जिनसे तनाव और गुस्सा आता है। सीधी-सी बात यह है कि जो कुछ आपको रिलैक्स करे, उसे जरूर करें ताकि सैड से बचे रहें।

शराब छोड़ें

शराब को महाभारत, मनुस्मृति, कुरआन आदि में बिना वजह महापाप और हराम नहीं बताया गया है। शराब स्वस्थ नींद में हस्तक्षेप करती है। भले ही आप सोने के लिए शराब पीयें, लेकिन उससे पर्याप्त आराम नहीं मिलता। हकीकत यह है कि सोने से पहले अगर आप शराब का सेवन नहीं करेंगे तो आप अगली सुबह तरोताजा उठेंगे।

साथ ही यह सुनिश्र्चित कर लें कि आप रोजाना पर्याप्त पानी पी रहे हैं। प्यास को भूख समझ लेना एक आम गलती है। लोग पावभाजी या पिज्जा खाते हैं जबकि उन्हें जरूरत सिर्फ एक गिलास पानी की होती है।

कभी-कभी हल्का सा डिहाईडेशन भी आपको थकन और कमजोरी महसूस करा देता है। वर्कआउट के बाद तो पानी पीना बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि आपका जिस्म और अधिक फ्लूइड की मांग करता है।

– डॉ. माजिद अलीम

 

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