सुमिरन कर ले, मोरे मना भजन

सुमिरन कर ले, मोरे मना।
बिती जाय उमर, हरी नाम बिना॥ टेर ॥
कूप निर बिना, धेनू छीर बिना।
बादल देखो, मेघ बिनारे॥
जैसे तरुवर फल बिना हिना, तैसे प्राणी हरी नाम बिनारे॥ 1 ॥
देह नैन बिना रैन चन्द्र बिना।
मन्दिर देखो, दीप बिना रे॥
जैसे पण्डित वेद बिना हिना, वैश्या को पुत्र, पिता बिन हिना।
वैसे प्राणी हरीनाम बिना रे॥ 2 ॥
काम क्रोध मद लोभ निवारो।
छोडो इर्ष्या सन्तजना रे॥
कहे गुरुनानक, सुनो भगवन्ता।
ये जग में नहीं, कोई अपना रे॥ 3 ॥

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