अक्वाकल्चर – समुद्र में नौकरियों का खज़ाना

खेती लायक भूमि में लगातार हो रही कमी, बढ़ती आबादी और गहराता खाद्य संकट, इन सब बातों को देखते हुए आने वाले दिनों में सी-फूड्स पर पूरी दुनिया की खाद्य निर्भरता काफी ज्यादा होगी। यही कारण है कि अक्वाकल्चर पर अब गंभीरता से ध्यान दिया जा रहा है। भारत की समुद्री सीमा 7500 किलोमीटर लंबी है यानी भारत में इतना विशाल समुद्रतट है। इसलिए भी अक्वाकल्चर का हमारे देश में भविष्य बहुत अच्छा है।

Career in Aquacultureअक्वाकल्चर में अक्वा शब्द अरबी भाषा से लिया गया है जिसका मतलब है पानी। अक्वाकल्चर में दरअसल तमाम पानी के विशेष रूप से समुद्री जीवों जैसे- मछली, समुद्री केकड़ा, समुद्री सांप, सामान्य केकड़े और इसी तरह के दूसरे पानी के जीव-जंतुओं का अध्ययन किया जाता है। यह अध्ययन इन पानी के जीवों की देखरेख और उनके विकास के लिए जरूरी है। पहले अक्वाकल्चर का इतना उपयोग नहीं था, लेकिन अब समुद्री खाद्य सामग्री न सिर्फ बड़े पैमाने पर देश में खायी जा रही है बल्कि विदेशों के लिए इसका निर्यात भी खूब हो रहा है। इसलिए अक्वाकल्चर आने वाले दिनों में बहुत तेजी से विकास करेगी। कहने की जरूरत नहीं है कि इसमें रोजगार के भरपूर अवसर उपलब्ध होंगे।

एक अक्वाकल्चरिस्ट का काम पानी से उत्पन्न विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों और जीव-जंतुओं का बेहतर व्यावसायिक उत्पादन व संरक्षण करना होता है। चूंकि व्यावसायिक उत्पादन अंतिम परिणाम होता है और इस तक पहुंचने के लिए तमाम सारी स्थितियों से गुजरना पड़ता है, इसलिए अक्वाकल्चर में समुद्री जीव-जंतुओं व समुद्री वनस्पतियों के उत्पादन में विभिन्न स्तर पर सहायता करने वाले लोगों की दरकार होती है। तकनीकी से लेकर प्रबंधन तक के इस क्षेत्र में कई काम होते हैं। अक्वाकल्चर के क्षेत्र में जाने के लिए बी.एससी. इन बायलॉजी, फिशरीज़ एंड अक्वाकल्चर में मास्टर डिग्री के पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। इस क्षेत्र में कामों के कई तरह के वर्गीकरण होते हैं- फार्म मैनेजमेंट, हेचरी मैनेजमेंट, पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट आदि। बी.एससी. इन बायलॉजी में दाखिला लेने के लिए वे छात्र योग्य माने जाते हैं, जिन्होंने 10प्लस 2 भौतिक, रसायन एवं जीवविज्ञान के साथ उत्तीर्ण किया हो।

Career Aqua Culture Courseफिशरीज़ एंड अक्वाकल्चर में मास्टर डिग्री के लिए बी.एससी. इन बायलॉजी में कम से कम 65 फीसदी अंक आने अनिवार्य हैं। तब भी दाखिला प्रवेश परीक्षा और साक्षात्कार के आधार पर होता है। चूंकि अक्वाकल्चर क्षेत्र में रिसर्च की आवश्यकता पड़ती है इसलिए इस क्षेत्र के लिए उपयुक्त लोग वही माने जाते हैं जिनमें लम्बे रिसर्च का संयम हो। एक बार डिग्री हासिल कर देने के बाद अक्वाकल्चरिस्ट के लिए तमाम रोजगार के अवसर उपलब्ध होते हैं। जो लोग फार्म मैनेजमेंट यानी खेतिहर प्रबंधन पर डिग्री हासिल करते हैं, उनके लिए रुचि के मुताबिक पोंड (तालाब) डिजाइनिंग, पोंड प्रिपरेशन, पानी की गुणवत्ता का प्रबंधन, फीडिंग, ग्रोथ मॉनिटरिंग और हेजार्ड एनालिसिस जैसे कई काम होते हैं। इसी तरीके से जिन लोगों ने हेचरी मैनेजमेंट में डिग्री हासिल की होती है, उनके लिए स्टॉक कलेक्शन और क्रास ब्रीडिंग के महत्वपूर्ण काम होते हैं। जो लोग पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट की डिग्री हासिल करते हैं उन्हें प्रोसेसिंग डिपार्टमेंट और बाजार के प्रबंधन के क्षेत्र में काम करना होता है।

Career Aqua Culture 2अक्वाकल्चर तेजी से विकसित हो रहा एक बड़ा क्षेत्र है जहां सैकड़ों तरह की संभावनाएं पैदा हुई हैं। सरकारी, अर्द्धसरकारी और बहुराष्ट्रीय कंपनियां बड़े पैमाने पर इस क्षेत्र में निवेश कर रही हैं। भारत का समुद्री उत्पादन जहां अभी दो दशक पहले तक महज कुछ सौ करोड़ रुपये तक सीमित था, वहीं आज यह बढ़कर 20 हजार करोड़ रुपये सालाना तक पहुंच गया है और आने वाले एक दशक में इसके एक लाख करोड़ रुपये के सालाना टर्नओवर को क्रास करने की संभावना है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह क्षेत्र कितना महत्वपूर्ण है और कितनी तेजी से बढ़ रहा है। सिर्फ बड़ी कंपनियों और सरकार के स्तर पर ही नहीं बल्कि मत्स्य और केकड़ा पालन अब छोटे-छोटे किसानों के लिए भी नगदी फसल का एक महत्वपूर्ण जरिया बनता जा रहा है। इस कारण यह कहना अतिशयोक्ति नहीं है कि आने वाले दिनों में डॉक्टरों और इंजीनियरों से ज्यादा मांग अक्वाकल्चरिस्ट की होगी। खेती के पारंपरिक तौर-तरीके बदल रहे हैं क्योंकि पारंपरिक खेती घाटे का सौदा बन चुकी है। इसलिए जिला स्तर पर ऐसे प्रशिक्षण केन्द्र खुल रहे हैं जो किसानों को अक्वाकल्चर के बारे में जानकारी देकर उनकी फसल चक्र को नये आयाम दे रहे हैं। इन प्रशिक्षण स्थलों में भी बड़े पैमाने पर अक्वाकल्चरिस्ट की भविष्य में जरूरत पड़ेगी।

अक्वाकल्चरिस्ट बनने के लिए विभिन्न संस्थानों से ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्री हासिल की जा सकती है। कुछ प्रमुख संस्थान इस प्रकार हैं-

  • यूनिवर्सिटी ऑफ मुंबई, मुंबई, महाराष्ट्र
  • सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फिशरीज एजुकेशन, काकीनाडा, आंध्रप्रदेश
  • कॉलेज ऑफ फिशरीज तूतीकोरिन, तमिलनाडु
  • मैरीन प्रोडक्ट प्रोसेसिंग सेंटर, मैंगलोर, कर्नाटक
  • कोलकाता यूनिवर्सिटी, कोलकाता, पश्र्चिम बंगाल
  • राजेन्द्र एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, पूसा, बिहार
  • असम एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, जोरहाट, असम
  • मदुरई कामराज यूनिवर्सिटी, मदुरई, तमिलनाडु
  • सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फिशरीज, मुंबई, महाराष्ट्र
  • सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च, खड़कपुर
  • सेंट्रल पॉलिटेक्नीक, चेन्नई, तमिलनाडु
  • तमिलनाडु एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, कोयंबटूर
  • जीबी पंत यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर, पंत नगर, उत्तरांचल

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