फूड ऑफ लव एंड गॉड

अगर आप सोचते हैं कि चॉकलेट “फूड ऑफ लव’ है तो ऐसा सोचने वाले आप अकेले नहीं हैं। ठोस व डार्क चॉकलेट में सेहत संबंधी जबरदस्त फायदे हैं। अगर आप सोचते हैं कि चॉकलेट स्वर्ग से उतरा हुआ शानदार फूड है, तो भी आप अकेले ऐसा सोचने वाले नहीं हैं। चॉकलेट का जो वानस्पतिक नाम है थियोब्रोमा काकाओ, उसका अर्थ ही है- फूड ऑफ द गॉड्स यानी देवताओं का भोजन। लेकिन इसका सेवन करने के लिए आपका देवता होना जरूरी नहीं है। इंसान भी चॉकलेट को उसके हर रूप में पसंद करता है- साधारण चॉकलेट चिप कुकी से लेकर गारमेट गुडी़ज, विन्टी हॉट चॉकलेट और डिकाडेंट डेसट्र्स। साथ ही चॉकलेट को और ल़जी़ज व मनमोहक बनाने के लिए शोधकर्ता यह खोज रहे हैं कि इस प्राचीन टीट में कुछ आधुनिक स्वास्थ्य लाभ भी हैं। आइये, चॉकलेट के बारे में कुछ खास जानकारी हासिल करें-

चॉकलेट की खोज कब हुई थी?

सदियों पहले। माया संस्कृति के लोग या कबीले, कीमती कोकोआ बीन्स, जिससे चॉकलेट बनती है, का कॉमोडिटी (जीन्स) के रूप में व्यापार करते थे। 1519 में ए़जटेक ने खोजा कि वे रोस्टेड, ग्राउंड-अप कोकोआ बीन्स में पानी व मीठा मिलाने के बाद जायकेदार डिंक तैयार कर सकते हैं। 18वीं शताब्दी में चॉकलेट बार खुलने लगे, जिनमें चॉकलेट व दूध को मिश्रित किया जाता था।

क्या सभी चॉकलेट आपके लिए अच्छी हैं?

चॉकलेट को पसंद करने वाले जश्न मनायें, लेकिन इसके स्वास्थ्य लाभों को लेकर सतर्क रहें। चॉकलेट वास्तव में आपके लिए बहुत अच्छी हो सकती है, लेकिन सभी चॉकलेट बराबर की अच्छी नहीं होतीं। अगर आप चॉकलेट से स्वास्थ्य लाभ लेना चाहते हैं, तो थीवी, कारमैल, मार्श मैलो या ाीम कवर्ड चॉकलेट को भूल जायें और सॉलिड डार्क चॉकलेट को वरीयता दें।

डार्क चॉकलेट व्हाइट चॉकलेट से बेहतर क्यों?

चॉकलेट में स्वास्थ्य लाभ फ्लेवोनोइड्स से आते हैं। यह एक किस्म का फाइटोकेमिकल है, जो कोकोआ बीन्स में मिलता है। डार्क चॉकलेट में कोकोआ का प्रतिशत व्हाइट या मिल्क चॉकलेट की तुलना में अधिक होता है। ़जाहिर है चॉकलेट में जितना ज्यादा कोकोआ होगा, उतना ही वह सेहत के लिए अच्छी होगी।

इसके स्वास्थ्य-संबंधी लाभ क्या हैं?

शोधों से मालूम हुआ है कि जब डार्क चॉकलेट स्वस्थ जीवन-शैली का हिस्सा होती है, तो उससे दिल की सेहत, ब्लडप्रेशर, शराब, कोलेस्टाल (एलडीएल) कम करने और दिमाग तक ब्लड फ्लो बढ़ाने में मदद मिलती है। इससे ब्लड शुगर भी संतुलित रहती है और इंसुलिन का स्तर भी, जिससे मधुमेह का खतरा कम हो जाता है।

कितनी चॉकलेट खानी चाहिए?

स्वास्थ्य लाभ भरपूर मिले, इसके लिए मात्रा सीमित कर लेनी चाहिए। हालांकि चॉकलेट में आपके भले के लिए फ्लेवोनोइड्स होते हैं, लेकिन इसमें फैट, शुगर और कैलोरी भी होती हैं, जिनकी ज्यादा मात्रा नुकसान पहुंचाती है। इसलिए जरूरत से ज्यादा चॉकलेट खाने से उसके स्वास्थ्य लाभ नगण्य हो जाएंगे और वजन बढ़ जायेगा, साथ ही मोटापे से संबंधित स्वास्थ्य समस्याएं भी। लगभग एक औंस आपके टेस्ट बड्स को संतुष्ट कर देगा, बशर्ते कि आप उसे धीरे-धीरे खाएं, इससे आपको स्वास्थ्य लाभ भी मिलेगा, साथ ही तोंद भी नहीं बढ़ेगी।

चॉकलेट में कितना कोकोआ हो?

जितना ज्यादा कोकोआ का होगा, उतने ही अधिक उसमें फ्लेवोनोइड्स होंगे। ज्यादातर मिल्क चॉकलेट में 50 प्रतिशत कोकोआ होता है, जबकि कुछ सस्ती चॉकलेटों में मात्र 7 प्रतिशत ही होता है। आप डॉर्क चॉकलेट को वरीयता दें, जिसमें कम से कम 70 प्रतिशत कोकोआ हो, क्योंकि उसी से ही आपको फायदा होगा।

क्या चॉकलेट कामोद्दीपक है?

एजटेक के लोग चॉकलेट को शाही ऑफअरड़िजर यानी कामोद्दीपक समझते थे। माया लोग चॉकलेट को प्रजनन देवता से जोड़ते थे और आज चॉकलेट को प्रेम से जोड़ा जाता है, लेकिन इस संदर्भ में वैज्ञानिक तथ्य यह हैं कि चॉकलेट में फिनाइल इथेलामाइन और सेरोटोनिन रसायन होते हैं। इनके बारे में समझा जाता है कि यह मूड अच्छा कर देते हैं और सेक्सुअल उत्तेजना भी पैदा करते हैं। चॉकलेट खाने से अच्छापन महसूस होता है और आनंद भी आता है, लेकिन इसके ऑफअरड़िजइक गुण सेंसुअल आनंद को लेकर ज्यादा हैं कि यह आपके मुंह में घुलती किस तरह से है। सेक्सुअल स्टिम्युल्स के तौर पर यह कुछ खास नहीं है।

– करमचंद

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