अन्तरिक्ष तकनीकों के उपयोग

heart-painहृदय-रोगियों के द्वारा प्रयोग किये जाने वाले पेसमेकर का विकास कभी भी मेडिकल क्षेत्र के लिए नहीं किया गया था, बल्कि इसका प्रयोग अंतरिक्ष की कक्षा में मुक्त रूप से घूम रहे उपग्रहों और प्रोबों के स्वास्थ्य मॉनीटरन के लिए किया गया था। पेसमेकर की मदद से हृदय-रोगी अपनी असामान्य हृदय धड़कनों के बावजूद स्वस्थ और सक्रिय जीवन जी सकते हैं। रक्त संचार/प्रवाह की मॉडलिंग

द्रुतगामी और सुरक्षित वायुयानों के ड़िजाइन के लिए नासा के अनुसंधानकर्ताओं ने ऐसी कम्प्यूटर तकनीक का प्रयोग किया है, जिससे इस बात का अध्ययन किया जा सके कि अत्यधिक तीव्र गतियों में हवा कैसे प्रवाहित होती है। आज उसी तकनीक का प्रयोग हृदय में रक्त-प्रवाह के अध्ययन के लिए किया जाता है। रक्त-प्रवाह प्रिाया की समझ से कृत्रिम हृदय वॉल्व और यहॉं तक कि कृत्रिम हृदय और हृदय-पम्प को ड़िजाइन किया जा सकता है। रक्त-प्रवाह की परिशुद्घ मॉडलिंग के आधार पर अनुसंधानकर्ता इन युक्तियों की ड़िजाइन कर सकते हैं। इसके आधार पर लाल रक्त कोशिकाओं की क्षति कम की जा सकती है। इन अध्ययनों से प्राप्त ज्ञान से “हार्ट-अटैक’ को रोका जा सकता है।

स्वचालित रक्त विश्र्लेषक

इस संस्थान ने एक लघु युक्ति का विकास किया है, जिसके द्वारा रक्त की एक बूँद से रक्त का शीघ्रता से पृथक्कीकरण और विश्र्लेषण किया जा सकता है। आज उसी स्वचालित रक्त विश्र्लेषक का प्रयोग डॉक्टर तीव्र गति से कर रहे हैं इसके विधि द्वारा मात्र 5 मिनट में 80 से 100 प्रकार के रक्त सैम्पलों की जॉंच की जा सकती है।

व्यायाम उपकरण

अन्तरिक्ष यात्रियों की हृदय गति के मापन के लिए विकसित “इलेक्टोड तकनीक’ के द्वारा एक व्यायाम उपकरण का विकास किया गया है, जो उपभोक्ता की हृदय धड़कन का लगातार मॉनीटर करता है और मशीन की गति को तदनुसार सेट कर देता है। आज इस उपकरण का प्रयोग जिमखाना और रीहैबिलिटेशन केंद्रों में किया जा रहा है।

ले़जर एन्जियोप्लास्टी

आज डॉक्टरों के पास हृदय रोग से लड़ने के लिए एक नया शक्तिशाली अस्त्र है। इसके लिए अन्तरिक्ष तकनीकी धन्यवाद की पात्र है। ले़जर तंत्र जिसका पहली बार उपयोग उपग्रह आधारित अध्ययनों के लिए किया गया था उसका प्रयोग आज “अथेरोस्क्लेरोसिस’ (अर्थात धमनियों में वसा का जमा हो जाना) का उपचार करने के लिए किया जा रहा है। धमनियों में इनके जमा होने से मानव हृदय-रोग से ग्रसित हो जाता है। इस उपचार को लेजर एन्जियोप्लास्टी कहते हैं। ले़जर एंजियोप्लास्टी सस्ती होती है और बाई-पास शल्य-चिकित्सा की तुलना में कम खतरनाक और कम जोखिम वाली होती है। इसके अतिरिक्त लेजर चिकित्सा वर्तमान के बाई-पास विकल्प “बैलून एंजियोप्लास्टी’ की तुलना में अधिक उपयोगी हो सकती है।

हृदय संबंधी प्रतिबिंबन तंत्र (कार्डियक इमैजिंग सिस्टम)

कम्प्यूटर के द्वारा निर्मित हृदय की प्रतिबिम्बि की से खतरनाक हृदय के अवरोधों का डॉक्टर बड़ी आसानी से पता कर सकते हैं। इस तरीके में एक पतली नली (जिसे कैथेटर कहते हैं, जिसके अन्त में एक बैलून लगा होता है) को वसा से जमी हुई धमनी के अंदर प्रविष्ट कराया जाता है। कैथेटर का मार्गदर्शन हृदय-रोग विशेषज्ञ एक प्रतिबिम्बन तंत्र के द्वारा करता है। टेलीविजन मॉनीटर पर यह दृश्य दिखाई देता है। बैलून एंजियोप्लास्टी की आवश्यकता दिनोंदिन बढ़ती जा रही है।

इसके विकल्प के रूप में प्रतिबिंबन तंत्र का उपयोग किया जा रहा है, जिससे एंजियोप्लास्टी का संचालन सम्भव हो पाया है। इस प्रतिबिंबन तंत्र का विकास सुदूर संवेदन उपग्रहों के लिए किया गया था।

स्पेस शटल की तकनीकी पर निर्मित हृदय-पम्प

स्पेस शटल को विश्र्व की सबसे जटिल मशीन कहते हैं। इसके तीन प्रमुख इंजनों को एक टर्बो पम्प 6 1/2 मिनट के अंदर 535,000 गैलन द्रव हाइडोजन एवं द्रव ऑक्सीजन का मिश्रण ईधन के तौर पर इन्हें सप्लाई कर देता है। यह टर्बो पम्प विश्र्व का सबसे शक्तिशाली पम्प है। इस पम्प की तकनीकी पर आधारित एक हृदय पम्प विकसित किया गया है, जिसकी लम्बाई 2 इंच, व्यास 1 इंच तथा भार 4 औंस है। यह बहुत छोटा है। छोटे बच्चे की छाती में भी लगाया जा सकता है। यह 6 महीने तक हृदय के विकल्प के रूप में कार्य कर सकता है। उन लोगों के लिए अत्यधिक उपयोगी है, जो हार्ट टान्सप्लान्ट कराने के लिए किसी “डोनर’ के इंतजार में रहते हैं। इस हृदय पम्प का रोपण कई रोगियों में किया गया और काफी सफल पाया गया।

हृदय शल्य चिकित्सा से संबंधित औषधियों का विकास

अंतरिक्ष के सूक्ष्म गुरुत्व वातावरण में विशिष्ट प्रकार के िास्टलों का निर्माण किया जा सकता है, जो हृदय रोगों में सहायक हो सकते हैं। स्पेस शटल के मिशन एस.टी.एस.-50 के दौरान “फैक्टर डी िास्टल’ को सफलतापूर्वक ग्रो किया गया था। इस प्रकार के िास्टल ओपेन हार्ट शल्य चिकित्सा करवा चुके मरीजों के लिए उपयोगी सिद्घ हो सकते हैं। नासा और अल्बामा-बरमिंघम के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी औषधि का विकास किया है, जो ओपेन हार्ट शल्य चिकित्सा के समय होने वाली शारीरिक हानियों से बचाती है। इस औषधि का निर्माण इस प्रकार किया गया है कि यह शरीर के प्रतिरोधी तंत्र की अनावश्यक प्रतििाया को रोकती है।

सुदूर क्षेत्र से भौतिक परीक्षणों का संचालन

स्पेस शटल के मिशन एस.टी.एस. – 89 के दौरान एक विशिष्ट उपकरण “टेलीमेडिसिन उपकरण पैक’ (टीआईपी) भेजा गया था, जिससे अन्तरिक्ष यात्री एक-दूसरे के शारीरिक जैविक गणकों जैसे हृदय, फेफड़ों, कान, नाक, त्वचा, रक्त से सम्बन्धित इलेक्टोकार्डियोग्राम डाटा इत्यादि का मापन करके नासा के डॉक्टरों को रोग निदान और उपचार से संबंधित परामर्श के लिए भेज सकें।

एक्स-किरण एंजियोग्राम के द्वारा हृदय की धमनियों की बीमारी का कम्प्यूटर मापन

एक्स-किरण एंजियोग्राम के द्वारा परिशुद्घता से हृदय की धमनियों के अवरोधों का मापन किया जा सकता है। इस तकनीक से हृदय की धमनियों में होने वाले अत्यधिक सूक्ष्म परिवर्तनों की जॉंच की जा सकती है।

माइाोवेव आवृत्तियों के प्रयोग से हृदय-रोगों का उपचार

उच्च आवृत्ति की तरंगों को माइाोवेव कहते हैं। भविष्य में माइाोवेव और मिली मीटर वेव तरंगों का प्रयोग असामान्य हृदय धड़कन के उपचार एवं अवरोधित धमनियों की दीवारों से अवांछनीय तत्वों को हटाने के लिए किया जाएगा। लघु आकार की कैथेटर तरंगें रोगग्रस्त ऊतकों को गर्म करके क्षतिग्रस्त रक्त कोशिकाओं को पिघला देंगी। पारम्परिक उपचार विधि से धमनियों को क्षति पहुँचती है और समय के साथ-साथ वे पुनः संकरी होने लगती हैं। इस सूक्ष्मीकृत तकनीकी के प्रयोग से जोखिम काफी कम हो जाता है।

अल्टासाउंड प्रतिबिम्बों से रक्त को सिर तक ले जाने वाली धमनी (कैरोटिड) के रोग का कम्प्यूटरी मापन

अल्टा साउंड प्रतिबिम्ब के द्वारा कैरोटिड धमनी की दीवार की मोटाई का उच्च परिशुद्घता से मापन करने के लिए विशेष प्रकार की कम्प्यूटरी विधियों का विकास किया गया है। कैरोटिड की दीवार की मोटाई सामान्य रूप में धमनी संबंधी बीमारी का एक महत्वपूर्ण इन्डीकेटर होती है। इसका सीधा संबंध कोरोनरी रोग से होता है। यह अल्टा साउंड तरीका, जो हृदय-रोग उपचार के नये तरीकों की जॉंच करता है, कैरोटिड दीवार की मोटाई में हुए अत्यंत सूक्ष्म परिवर्तनों की जॉंच सकता है। इसका महत्वपूर्ण लाभ यह है कि इसमें गैर-नुकसानदायक (नॉन-इन्वेसिव) अल्टा साउंड प्रतिबिम्बकी का प्रयोग किया जाता है, जो मरीज को किसी प्रकार की क्षति नहीं पहुँचाता। यह तरीका अनेक क्लीनिकल परीक्षणों और अध्ययनों में प्रयुक्त हो रहा है। कैरोटिड की दीवार की मोटाई एक फिजीशियन को किसी व्यक्ति के “हार्ट-अटैक’ की सम्भावना से अवगत करा सकती है। इस प्रकार यह कोरोनरी धमनी रोग के लिए महत्वपूर्ण सीनिंग टेस्ट है।

इंटरनेट लाइनों के ऊपर मेडिकल डाटा का प्रेषण

क्लीवीलैन्ड क्लीनिक के सहयोग से नासा एक परीक्षण कर रहा है, जिसके अन्तर्गत इन्टरनेट आधारित तंत्र नासा का अनुसंधान एवं शिक्षण नेटवर्क के द्वारा डिजिटल इकोकार्डियोग्राम वीडियो प्रतिबिम्ब प्रेषित किये जाते हैं। इकोकार्डियोग्राफी तकनीक में अल्टासाउंड के द्वारा हृदय का मोशन चित्र बनाया जाता है। अल्टासाउंड के द्वारा जनित स्पष्ट प्रतिबिम्बों के द्वारा हृदय-रोग विशेषज्ञ अदृष्टिगोचर हृदय वॉल्व की लीकेज तथा अन्य हृदय समस्याओं का पता लगा सकते हैं। इस तकनीकी का विकास वर्तमान में निर्मित हो रहे अन्तर्राष्टीय अंतरिक्ष स्टेशन अल्फा के अन्तरिक्ष यात्रियों के हृदय प्रतिबिंबन (उनके अन्तरिक्ष प्रवास के दौरान) के लिए किया गया था।

फेटल (नवजात शिशु का गर्भ में) मॉनीटरन

आज सर्जन उच्च मेडिकल तकनीकी के द्वार गर्भ के भीतर ही शिशु की असामान्यताओं जैसे हृदय या फेफड़े आदि में

निहित

असामान्यताओं को ठीक करने में सक्षम हैं। यद्यपि इस विधि के अनेक फायदे हैं, लेकिन ऑपरेशन के बाद मॉनीटरन और केयर बहुत ही मुश्किल काम हो जाता है। इसके लिए नासा के अनुसंधान कर्ता कैलीफोर्निया विश्र्वविद्यालय (सानान्सिस्को) के सर्जनों के साथ मिलकर एक लघु, वायरलेस और इम्प्लान्टेबुल संवेदक विकसित कर रहे हैं, जो गर्भस्थ शिशु के विषय में महत्वपूर्ण सूचना भेज सकेगा।

महत्वपूर्ण लक्षणों का मॉनीटरन

भविष्य में डॉक्ट एक मरीज के शरीर के महत्वपूर्ण लक्षणों – हृदय गति, सांस की गति, तापाम एवं रक्त में ऑक्सीजन स्तर का पता करने के लिए एक लघु प्रोब का इस्तेमाल करेगा, जो आसानी से कान में फिट किया जा सकता है। यह प्रोब द्वारा लैपटॉप पर जैविक आँकड़े डिस्प्ले हो जाएँगे। नासा शीघ्र ही इस संवेदक तकनीकी का उपयोग स्पेस वाकों, स्पेस शटल के प्रमोचन और पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश के समय अन्तरिक्ष यात्रियों के जैविक आँकड़ों का मॉनीटरन करके उनके स्वास्थ्य की जानकारी रखेगा।

हृदय रोगों के उपचार में अन्तरिक्ष तकनीकों के उपयोग पर नासा के पूर्व प्रशासक डैनियल एस गोल्डिन के उद्गार

अन्तरिक्ष तकनीकों की मेडिकल क्षेत्र में उपयोगिता पर (विशेषकर हृदय रोगों के उपचार के ऊपर) नासा प्रशासक डैनियल गोल्डिन ने कहा है, “”मुझे गर्व है कि नासा के अनुसंधान डॉक्टरों को हृदय रोगों के उपचार में मदद कर रहे हैं। मेडिकल विज्ञान के लिए यह एक बड़ा आकर्षक समय है, जहॉं हमारे वैमानिकी और अंतरिक्ष कार्यामों के लिए किये गये विकास और परिणाम उस बीमारी के ऊपर अप्लाई किये जा सकते हैं, जिससे पृथ्वी के अनेक लोग प्रभावित हो रहे हैं।

अन्तरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में किये गये अनुसंधानों विशेषकर कार्डियोवैस्कुलर तंत्र के ऊपर किये गये कार्यों ने अनेक खोजों को जन्म दिया है, जिसमें शामिल हैं जॉंच-विधियॉं और उपचार। इनमें से अनेक कम कष्टदायक हैं, तो कुछ कम खर्च वाली हैं। आज अन्तरिक्ष से प्राप्त कुछ सुधारों/उपचारों में प्रमुख हैं – रक्त चाप मॉनीटर, स्वयं एडजस्ंिटग पेसमेकर, ईकेजी, व्यायाम उपकरण और अल्टासाउंड प्रतिबिंब। आने वाले कल में इस संदर्भ में शामिल होने वाली चीजे हैं- माइाोवेव शल्य चिकित्सा, ऊतकों का रिप्लेसमेंट, हृदय पम्प, निम्न विकिरण प्रतिबिंबकी और गर्भस्थ शिशु का प्रतिबिंबन।” गोल्डिन आगे कहते हैं, “”किसी ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि जिस लेजर किरण का उपयोग पृथ्वी की ओजोन परत के मापन के लिए किया गया उसी का उपयोग धमनियों के अवरोधों को साफ करने के लिए किया जाएगा। यदि भूतकाल का समय हमारा दिशा-निर्देशक था, तो हमारा भविष्य अन्तरिक्ष में मेडिकल विज्ञान को बढ़ावा देता रहेगा।”

– कालीशंकर

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